मन की बात के 12 साल पूरे, PM मोदी बोले- यह मेरे लिए तीर्थयात्रा जैसा सफर; किसानों, वैज्ञानिकों और स्वदेशी उत्पादों की सराहना

Mann Ki Baat 12 Years: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम के जरिए देशवासियों को संबोधित करते हुए जैविक खेती, जल संरक्षण, स्वदेशी उत्पादों, स्वास्थ्य सेवाओं और भारतीय वैज्ञानिकों की उपलब्धियों पर चर्चा की। उन्होंने दीपावली और छठ पर्व की शुभकामनाएं देते हुए लोगों से स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देने की अपील की।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ ने 12 साल का सफर पूरा कर लिया है। रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को आकाशवाणी के माध्यम से देशवासियों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने इस यात्रा को अपने लिए तीर्थयात्रा जैसा अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि मन की बात की शुरुआत 12 साल पहले विजयादशमी के पावन अवसर पर हुई थी और तब से यह सिलसिला लगातार जारी है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मन की बात के श्रोता उनके सहयात्री होने के साथ-साथ मार्गदर्शक भी हैं। इस कार्यक्रम के जरिए उन्हें देश के आम नागरिकों की मेहनत, साहस, समर्पण और सेवा भावना को करीब से जानने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि समाज और राष्ट्र के लिए जीवन समर्पित करने वाले लोग स्वयं किसी तीर्थ से कम नहीं हैं। मन की बात के माध्यम से वह देशवासियों की सामूहिक शक्ति को नमन करते हैं।

पंजाब में जैविक कपास की खेती को मिल रहा बढ़ावा

प्रधानमंत्री ने पंजाब में पारंपरिक खेती और हस्तकरघा को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि ‘खेती विरासत मिशन’ नामक संगठन ने मालवा क्षेत्र में प्राकृतिक कपास की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए ‘नव-त्रिंजन’ पहल शुरू की है।

इस पहल के तहत प्राकृतिक रंगों वाली जैविक कपास उगाई जाती है, जिससे धागे और कपड़े को रंगने के लिए अतिरिक्त रासायनिक रंगों की जरूरत नहीं पड़ती। इसके साथ ही बुनाई की कला को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए एक बुनाई स्कूल भी स्थापित किया गया है।

प्रधानमंत्री ने रामनदीप कौर, सुनेहा देवी और रजनी कौर जैसी महिलाओं का जिक्र किया, जो पहले मजदूरी और घरेलू कामों से जुड़ी थीं, लेकिन अब बुनाई का हुनर सीखकर अपने परिवारों की आर्थिक मदद कर रही हैं। उन्होंने बताया कि रेखा रानी द्वारा बुना गया एक शॉल भारत की राष्ट्रपति को भेंट किया गया है।

उत्तराखंड में हेवल नदी को नया जीवन

प्रकृति संरक्षण के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल क्षेत्र में हेवल नदी और आसपास के प्राकृतिक जलस्रोतों को पुनर्जीवित करने के प्रयासों की सराहना की।

उन्होंने बताया कि स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों ने मिलकर नदी को बचाने के लिए अभियान चलाया। इसके तहत वर्षा जल संचयन, भूजल स्तर बढ़ाने और बड़े पैमाने पर पौधरोपण जैसे कदम उठाए गए। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप हेवल नदी को नया जीवन मिला और कई प्राकृतिक जलस्रोतों के पुनरुद्धार में मदद मिली।

प्रधानमंत्री ने कहा कि स्थानीय समुदायों की भागीदारी से पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव लाए जा सकते हैं।

स्वदेशी उत्पादों की बढ़ती मांग, खादी की बिक्री 28 करोड़ रुपये के पार

त्योहारी सीजन के दौरान प्रधानमंत्री ने लोगों से स्वच्छता बनाए रखने और स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना भारतीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने में मदद कर रही है।

मोदी ने उदाहरण देते हुए बताया कि बिहार के पूर्णिया का मखाना अब ग्रीस तक पहुंच रहा है, जबकि कर्नाटक के कलबुर्गी की अरहर दाल का निर्यात मालदीव तक किया जा रहा है। इससे भारतीय किसानों के लिए नए बाजार खुल रहे हैं।

उन्होंने महाराष्ट्र के आदिवासी समुदायों की ‘शबरी नेचुरल्स’ पहल का भी उल्लेख किया। इसके माध्यम से शहद, महुआ, चिरौंजी और बांस से बने उत्पादों को जनजातीय कला से प्रेरित आकर्षक पैकेजिंग के साथ बाजार में लाया जा रहा है। इस पैकेजिंग को जापान का प्रतिष्ठित ‘गुड डिजाइन अवॉर्ड’ भी मिला है।

प्रधानमंत्री ने बताया कि इस साल गांधी जयंती पर खादी ग्रामोद्योग के उत्पादों की बिक्री एक दिन में 28 करोड़ रुपये से अधिक रही, जो पिछले साल की तुलना में 1.5 करोड़ रुपये ज्यादा है। उन्होंने कहा कि स्थानीय कारीगरों और हस्तशिल्प से जुड़े लोगों को प्रोत्साहन देने से आत्मनिर्भर भारत का सपना साकार करने में मदद मिलेगी।

ई-संजीवनी से करीब 50 करोड़ टेली-कंसल्टेशन

प्रधानमंत्री मोदी ने डिजिटल स्वास्थ्य सेवा ‘ई-संजीवनी’ की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से अब तक करीब 50 करोड़ टेली-कंसल्टेशन किए जा चुके हैं।

उन्होंने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, लद्दाख और नगालैंड के उदाहरण साझा किए, जहां दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले मरीजों को विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह मिली। इनमें बुखार और निमोनिया से पीड़ित एक जनजातीय बच्चे, गर्भावस्था में जटिलताओं का सामना कर रही एक महिला और कान के संक्रमण से पीड़ित एक बच्चे के मामले शामिल थे।

मोदी ने कहा कि तकनीक, डॉक्टरों की प्रतिबद्धता और लोगों के भरोसे से स्वास्थ्य सेवाओं को देश के दूरस्थ इलाकों तक पहुंचाना संभव हुआ है। उन्होंने यह भी बताया कि देशभर में लगभग 1.90 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिर लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

IIT मद्रास में ब्रेन रिसर्च और डीप-टेक स्टार्टअप पर चर्चा

प्रधानमंत्री ने चेन्नई दौरे के दौरान वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और युवाओं से हुई मुलाकातों का जिक्र करते हुए ‘सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर’ की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। यह केंद्र मानव मस्तिष्क की उच्च गुणवत्ता वाली डिजिटल 3D इमेज तैयार करने की तकनीक पर काम कर रहा है। इसका लक्ष्य 100 मानव मस्तिष्कों का विस्तार से अध्ययन करना है।

प्रधानमंत्री के अनुसार, इस परियोजना में ‘परम शक्ति’ सुपरकंप्यूटर का उपयोग किया जा रहा है। इन मस्तिष्कों से संबंधित डेटा को शोध के लिए ओपन-सोर्स संसाधन के रूप में उपलब्ध कराने की भी योजना है। उन्होंने अल्जाइमर और डिमेंशिया जैसी बीमारियों के अध्ययन में ऐसे शोध के महत्व को रेखांकित किया।

उन्होंने अंगदान के महत्व का उल्लेख करते हुए मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम की शिवानी का उदाहरण दिया, जिनकी सड़क दुर्घटना में मृत्यु के बाद उनके परिवार ने अंगदान का निर्णय लिया।

IIT मद्रास से जुड़े स्टार्टअप्स की चर्चा करते हुए मोदी ने सोने की गुणवत्ता की जांच, बैंक धोखाधड़ी में खोए धन की जल्द वसूली, एआई की मदद से सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग, समुद्र के ऊपर उड़ने वाले इलेक्ट्रिक वाहन और ड्रोन व इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए फास्ट-चार्जिंग बैटरी जैसी तकनीकों का उल्लेख किया।

मिलेट्स, सरदार पटेल और महर्षि वाल्मीकि का भी जिक्र

प्रधानमंत्री ने मेघालय और नगालैंड में मोटे अनाज यानी मिलेट्स की खेती को बढ़ावा देने वाले प्रयासों की सराहना की। मेघालय के खंडुली गांव में महिलाओं ने मिलेट्स से कुकीज, केक, मफिन और बच्चों के लिए खाद्य उत्पाद तैयार किए, जिससे इन फसलों की मांग बढ़ने में मदद मिली। नगालैंड के केजोमा गांव में भी वर्षों बाद मिलेट्स की खेती दोबारा शुरू हुई और 2025 में वहां पहला मिलेट्स उत्सव आयोजित किया गया।

मोदी ने 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर मनाए जाने वाले ‘एकता दिवस’ का उल्लेख करते हुए लोगों से ‘रन फॉर यूनिटी’ में भाग लेने की अपील की। उन्होंने महान भारतीय वैज्ञानिक नरेंद्र सिंह कपानी को भी याद किया, जिन्हें फाइबर ऑप्टिक्स के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए जाना जाता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि की रामायण आज भी समाज को सेवा, करुणा, धैर्य और सामाजिक सद्भाव का संदेश देती है। उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर परिसर में महर्षि वाल्मीकि, निषादराज और माता शबरी को समर्पित मंदिरों का भी उल्लेख किया।

कार्यक्रम के समापन पर प्रधानमंत्री ने दीपावली और छठ सहित आगामी त्योहारों की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने लोगों से त्योहारों को सुरक्षित और स्वस्थ तरीके से मनाने तथा मन की बात के लिए अपने संदेश और सुझाव भेजने का आग्रह किया।

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