इजरायल चुनाव में घमासान: नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने अरब दलों पर लगाया चुनाव चुराने का आरोप

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इजरायल में आम चुनाव के नतीजों के बीच राजनीतिक तनाव बढ़ गया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने अरब नेतृत्व वाली पार्टियों पर चुनाव में धांधली करने और जनादेश चुराने का आरोप लगाया है। पार्टी ने मतदाताओं को डराने-धमकाने, रिश्वत देने, हिंसा और फर्जीवाड़े जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस, इजरायली खुफिया एजेंसी शिन बेट और केंद्रीय चुनाव समिति से जांच कराने की मांग की है। हालांकि, ये आरोप फिलहाल लिकुड पार्टी के दावे हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से साबित किया जाना बाकी है।

लिकुड पार्टी ने लगाए गंभीर आरोप

मंगलवार, 27 अक्टूबर को हुए चुनाव के बाद लिकुड पार्टी ने बयान जारी कर दावा किया कि अरब पार्टियों ने चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए कथित तौर पर गैरकानूनी तरीके अपनाए। पार्टी ने आरोप लगाया कि मतदाताओं को रिश्वत दी गई, चुनाव अधिकारियों को धमकाया गया और मतदान में गड़बड़ी करने के लिए अवैध सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया गया।

लिकुड का कहना है कि उसके पास कथित अनियमितताओं से संबंधित गवाहियां और अन्य साक्ष्य हैं, जिन्हें पुलिस, शिन बेट और केंद्रीय चुनाव समिति को सौंपा जाएगा। पार्टी ने मामले की विस्तृत जांच कराने और चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों पर कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

अरब पार्टियों को मिल सकती हैं रिकॉर्ड 19 सीटें

इजरायल के चुनावी नतीजों में अरब नेतृत्व वाली पार्टियों का प्रदर्शन चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है। उपलब्ध शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, इन पार्टियों को संयुक्त रूप से 19 सीटें मिलने का अनुमान है। इसे इजरायल की संसद नेसेट में उनकी अब तक की सबसे बड़ी संयुक्त उपस्थिति के रूप में देखा जा रहा है।

120 सदस्यों वाली नेसेट में सरकार बनाने के लिए किसी गठबंधन को कम से कम 61 सीटों का समर्थन चाहिए। शुरुआती नतीजों में प्रधानमंत्री नेतन्याहू के समर्थन वाले गुट को 53 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि उनके विरोध में खड़े यहूदी नेतृत्व वाले विपक्षी गुट को 48 सीटें मिलती दिखाई दे रही हैं। अरब नेतृत्व वाली पार्टियों की 19 सीटें जोड़ने पर नेतन्याहू विरोधी दलों की संभावित संख्या 67 तक पहुंचती है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि ये सभी दल एकजुट होकर सरकार बनाने पर सहमत हो गए हैं।

अरब नेताओं ने इजरायली समाज पर उठाए सवाल

अरब नेतृत्व वाली बालाद पार्टी के प्रमुख सामी अबू शहादेह ने चुनावी नतीजों और राजनीतिक परिस्थितियों पर टिप्पणी करते हुए इजरायली समाज में नस्लवाद का मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि अरब नेतृत्व वाली पार्टियों को विपक्ष का स्वाभाविक हिस्सा मानने में हिचकिचाहट दिखाई देती है। उनके मुताबिक, इसी राजनीतिक सोच के कारण नेतन्याहू के खिलाफ संभावित बहुमत को एक वैकल्पिक सरकार में बदलना आसान नहीं होगा।

अरब पार्टियों के बेहतर प्रदर्शन के बावजूद उनके सामने राजनीतिक गठबंधन में शामिल होने की चुनौती बनी हुई है। कई यहूदी नेतृत्व वाली विपक्षी पार्टियां अरब दलों के साथ औपचारिक गठबंधन करने को लेकर अनिच्छा जता चुकी हैं। ऐसे में संख्या के लिहाज से संभावित बहुमत होने के बावजूद सरकार गठन का रास्ता कठिन दिखाई दे रहा है।

नेतन्याहू के सामने सरकार बचाने की चुनौती

शुरुआती नतीजों में नेतन्याहू के नेतृत्व वाला गुट 61 सीटों के बहुमत से पीछे दिखाई दे रहा है। वहीं, उनके विरोधी दलों के पास अरब पार्टियों के समर्थन से वैकल्पिक सरकार बनाने की संभावना मौजूद है। लेकिन विपक्ष के भीतर वैचारिक मतभेद और अरब पार्टियों के साथ गठबंधन को लेकर असहमति इस संभावना को कमजोर कर सकती है।

ऐसे में आने वाले दिनों में राजनीतिक दलों के बीच बातचीत और समर्थन जुटाने की कोशिशें निर्णायक होंगी। यदि कोई भी गुट बहुमत साबित नहीं कर पाता है, तो इजरायल में सरकार गठन को लेकर लंबा राजनीतिक गतिरोध पैदा हो सकता है। अंतिम स्थिति चुनावी नतीजों और गठबंधन संबंधी फैसलों के बाद ही स्पष्ट होगी।

करीब छह लाख डबल-लिफाफा मतपत्रों की गिनती बाकी

चुनाव के बाद मतगणना अभी पूरी नहीं हुई है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, सामान्य मतदान केंद्रों के लगभग 93 प्रतिशत मतों की गिनती हो चुकी थी, लेकिन करीब छह लाख डबल-लिफाफा मतपत्रों की गिनती बाकी बताई गई। इनमें उन मतदाताओं के मत शामिल होते हैं, जो सामान्य मतदान केंद्रों से अलग व्यवस्था के तहत वोट डालते हैं। इन मतपत्रों की अलग से जांच की जाती है, ताकि मतदान की वैधता सुनिश्चित की जा सके।

इन मतों की गिनती के बाद सीटों के अंतिम आंकड़ों में बदलाव संभव है। इसलिए फिलहाल सामने आए आंकड़ों को शुरुआती नतीजों के तौर पर देखना जरूरी है। लिकुड के आरोपों की जांच, चुनाव समिति की समीक्षा और राजनीतिक दलों के बीच गठबंधन को लेकर होने वाली बातचीत तय करेगी कि इजरायल में अगली सरकार किस तरह बनेगी।

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