फरवरी 2027 में प्रस्तावित पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले राज्य का सियासी तापमान अचानक चरम पर पहुंच गया है। पंजाब में बेकाबू होते नशे के प्रकोप और चरमराती कानून-व्यवस्था को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (आप) सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने गुरुवार को एक संयुक्त प्रेस वार्ता में राज्य सरकार पर तीखे हमले बोले। इस दौरान सुनील जाखड़ ने एक बड़ा सियासी दांव चलते हुए घोषणा की कि वे आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेताओं—अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के पंजाब में प्रवेश पर रोक लगाने के लिए राज्यपाल से संपर्क करेंगे और इसके खिलाफ हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में कानूनी विकल्प भी तलाशेंगे।
प्रेस वार्ता के दौरान सुनील जाखड़ ने फाजिल्का जिले के जलालाबाद में हुई एक अत्यंत दुखद घटना का हवाला देते हुए बताया कि प्रेसवार्ता से ठीक पहले उन्हें सूचना मिली कि वहां नशे की ओवरडोज के कारण 16 वर्षीय किशोर की मौत हो गई है। जाखड़ ने भावुक होते हुए कहा कि कुछ ही समय पहले इस बच्चे के पिता की भी नशे के कारण ही जान चली गई थी, जिससे एक हंसता-खेलता परिवार पूरी तरह तबाह हो गया। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर सीधा आरोप लगाया कि राज्य का गृह मंत्रालय संभाल रहे मुख्यमंत्री जमीनी हकीकत को स्वीकारने के बजाय नशे की भयावहता पर पर्दा डालने में लगे हैं। जाखड़ ने कहा कि वे इस संबंध में राज्यपाल को औपचारिक पत्र लिख रहे हैं और भाजपा का एक प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से मिलकर राज्य के मौजूदा हालात से अवगत कराएगा, ताकि पंजाब में निष्पक्षता बहाल करने के लिए बिना किसी देरी के आचार संहिता लागू की जा सके।
दूसरी ओर, भाजपा नेता तरुण चुघ ने राज्य की आंतरिक सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि पंजाब की कानून-व्यवस्था इस समय अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। उन्होंने दावा किया कि राज्य के 23 थानों पर ग्रेनेड हमले हो चुके हैं और यहां तक कि पंजाब पुलिस के मुख्यालय पर रॉकेट लॉन्चर से हमला किया गया। चुघ ने आरोप लगाया कि स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि पुलिसकर्मियों को अपनी वर्दी में घर आने-जाने से बचने की हिदायत दी जा रही है। उन्होंने कहा कि जो पुलिस की वर्दी और थाने आम जनता की सुरक्षा का प्रतीक हुआ करते थे, आज वे खुद खौफ के साए में हैं। चुघ ने आप सरकार पर नशा तस्करों और अपराधियों के आगे घुटने टेकने का आरोप लगाते हुए कहा कि राजनीतिक दबाव के कारण पंजाब पुलिस लाचार हो चुकी है, गैंगस्टर खुलेआम फिरौती और हत्याओं को अंजाम दे रहे हैं और पंजाब देश की ‘क्राइम कैपिटल’ बनता जा रहा है।
भाजपा के इन तीखे हमलों के बीच पंजाब सरकार के वरिष्ठ मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने पलटवार करते हुए पराली प्रबंधन को लेकर सरकार की पीठ थपथपाई। चीमा ने दावा किया कि राज्य सरकार के सुनियोजित प्रयासों के चलते पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं लगभग पूरी तरह समाप्त हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों के दौरान किसानों को पराली एकत्र करने और आधुनिक प्रबंधन के लिए व्यापक स्तर पर कृषि उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं, जिसके सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर दिखाई दे रहे हैं। चीमा ने कहा कि राज्य के किसान पराली नहीं जलाना चाहते और सरकार उनके सहयोग से इस दिशा में ऐतिहासिक सफलता हासिल कर रही है। हालांकि, पराली के इस सरकारी दावे के बावजूद, नशे और बिगड़ती कानून-व्यवस्था के मुद्दों ने पंजाब की चुनावी बिसात पर विपक्षी दलों को एक बड़ा राजनीतिक हथियार थमा दिया है।







