देश की राजधानी दिल्ली का ऐतिहासिक रामलीला मैदान आज विपक्षी एकजुटता के एक बड़े और ऐतिहासिक शक्ति प्रदर्शन का गवाह बनने जा रहा है। चुनाव प्रणाली में कथित गड़बड़ियों, मतदाता सूचियों से नाम हटाए जाने और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की कार्यशैली के विरोध में आयोजित इस ‘इंडिया’ (INDIA) ब्लॉक की महारैली के लिए विपक्षी दलों के तमाम शीर्ष नेता एक साथ रामलीला मैदान की ओर रवाना हो चुके हैं। मैदान की तरफ बढ़ते इस काफिले में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (TMC), समाजवादी पार्टी (सपा), राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) समेत गठबंधन के लगभग सभी प्रमुख घटक दलों के चेहरे नजर आ रहे हैं, जिससे दिल्ली की राजनीतिक सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है।
रवाना होने वाले नेताओं में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी,जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला, बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव, राकांपा (शरदचंद्र पवार) की सुप्रिया सुले, टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी और कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल सहित कई कद्दावर नेता शामिल हैं। ये सभी नेता आपसी मतभेदों को दरकिनार कर एक साझा मंच से देश की जनता और सरकार को बड़ा संदेश देने के इरादे से एक साथ आगे बढ़ रहे हैं। काफिले के आगे बढ़ने के दौरान विपक्षी कार्यकर्ताओं का भारी उत्साह देखा जा रहा है, जो लगातार गठबंधन के समर्थन में और सरकार के विरोध में नारेबाजी कर रहे हैं।
रामलीला मैदान में आयोजित होने वाली इस विशाल रैली में 10 लाख से अधिक कार्यकर्ताओं और आम जनता के जुटने का अनुमान लगाया जा रहा है,जिसके मद्देनजर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह मार्च और रैली केवल राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे, निष्पक्ष चुनाव प्रणाली और नागरिकों के वोट देने के बुनियादी अधिकार को बचाने की एक साझी लड़ाई है। ‘इंडिया’ ब्लॉक के नेताओं का एक साथ रामलीला मैदान की ओर रवाना होना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि आगामी दिनों में चुनावी मैदान से लेकर संसद तक सरकार को घेरने के लिए विपक्ष ने अपनी रणनीति को पूरी तरह से धार दे दी है। मंचासीन होने के बाद इन सभी नेताओं के भाषणों पर देश भर की सियासी नजरें टिकी हुई हैं।







