राजधानी जयपुर के शिवदासपुरा थाना क्षेत्र स्थित पूर्णिमा यूनिवर्सिटी में एमबीए की 23 वर्षीय छात्रा द्वारा छठी मंजिल से छलांग लगाकर की गई आत्महत्या के मामले में एक नया और बेहद सनसनीखेज पहलू सामने आया है। पुलिस जांच और डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल के दौरान छात्रा द्वारा जान देने से ठीक पहले अपने बॉयफ्रेंड को भेजा गया अंतिम व्हाट्सएप मैसेज सामने आया है। इस मार्मिक संदेश में छात्रा ने अपने बॉयफ्रेंड को एक बेहद नेक इंसान बताते हुए उसके साथ विश्वासघात करने की बात स्वीकार की है और बार-बार माफी मांगी है। इस नए डिजिटल साक्ष्य के सार्वजनिक होने के बाद यह पूरा सुसाइड केस और अधिक जटिल व उलझता नजर आ रहा है।
“मेरी गलती माफी लायक नहीं”: आखिरी संदेश में छलका पछतावा
पुलिस सूत्रों के अनुसार, छात्रा ने आत्मघाती कदम उठाने से चंद मिनट पहले अपने सहपाठी और बॉयफ्रेंड को व्हाट्सएप पर लंबा संदेश भेजा था। मैसेज में छात्रा ने लिखा कि उसने उसके साथ धोखा किया है, जो किसी भी सूरत में माफ करने योग्य नहीं है। उसने भावनात्मक रूप से टूटते हुए लिखा कि अगर जिंदगी में उसे दोबारा कभी मौका मिला तो वह कभी धोखा नहीं देगी।
बताया जा रहा है कि छात्रा का बॉयफ्रेंड भी उसी यूनिवर्सिटी में एमबीए का छात्र है। दोनों अहमदाबाद स्थित एक लॉजिस्टिक कंपनी में इंटर्नशिप के लिए गए थे। पहले छात्र को दूसरी कंपनी आवंटित हुई थी, लेकिन छात्रा के साथ रहने के लिए उसने प्रबंधन से विशेष आग्रह कर उसी कंपनी में अपनी इंटर्नशिप लगवाई थी। जानकारी के अनुसार, अहमदाबाद में इंटर्नशिप के दौरान कंपनी के वरिष्ठ पदाधिकारी से छात्रा के संपर्कों को लेकर दोनों के बीच गंभीर मतभेद और विवाद भी हुआ था। सहपाठी लगातार उसे दूर रहने की समझाइश देता था, लेकिन इस दौरान दोनों के बीच दूरियां बढ़ती चली गईं।
कंपनी मालिक पर धोखे से वीडियो बना ब्लैकमेल करने की FIR
दूसरी ओर, मृतका के परिजनों ने अहमदाबाद की ‘ब्लू वेव लॉजिस्टिक प्राइवेट लिमिटेड’ के मालिक योगेश मोटयानी पर बेहद गंभीर और संगीन आरोप लगाए हैं। परिजनों का आरोप है कि इंटर्नशिप के दौरान आरोपी ने झूठे प्रलोभन देकर छात्रा का शोषण किया और धोखे से उसके आपत्तिजनक निजी वीडियो बना लिए। इसके बाद आरोपी लगातार उन वीडियो को सार्वजनिक करने की धमकी देकर छात्रा पर अनैतिक संबंध बनाने का दबाव डाल रहा था। परिवार का कहना है कि इसी असहनीय मानसिक प्रताड़ना और ब्लैकमेलिंग के चलते होनहार छात्रा गहरे तनाव में थी और उसने यह खौफनाक कदम उठाया।
पूर्णिमा यूनिवर्सिटी प्रशासन भी सवालों के घेरे में
परिजनों ने इस मामले में पूर्णिमा यूनिवर्सिटी प्रबंधन की भूमिका पर भी सीधे सवाल उठाए हैं और प्राथमिकी में यूनिवर्सिटी को भी नामजद कराया है। परिवार का कहना है कि संस्थान ने बिना उचित जांच-पड़ताल के छात्रा को असुरक्षित वातावरण वाली कंपनी में इंटर्नशिप के लिए भेजा। इसके अलावा,घटना के समय छठी मंजिल की छत का दरवाजा खुला होने पर भी सवाल खड़े किए गए हैं। परिजनों का तर्क है कि यदि सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए छत का दरवाजा बंद रखा गया होता, तो छात्रा वहां तक नहीं पहुंच पाती और एक अनमोल जान बचाई जा सकती थी।
यूनिवर्सिटी की सफाई: ‘सोलर पैनल सफाई के लिए खोला गया था दरवाजा’
लापरवाही के आरोपों पर पूर्णिमा यूनिवर्सिटी प्रशासन ने अपना पक्ष रखते हुए किसी भी तरह की चूक से इनकार किया है। यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर (एडमिनिस्ट्रेशन) अश्विनी लाटर के अनुसार, छत पर स्थापित सोलर पैनलों के आसपास नियमित साफ-सफाई के लिए कर्मचारियों को भेजा गया था,जिसके चलते घटना से करीब 20 मिनट पहले ही दरवाजा खोला गया था। प्रबंधन का दावा है कि इस पूरी प्रक्रिया की सीसीटीवी फुटेज पुलिस को सौंप दी गई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि छात्रा ने इंटर्नशिप कंपनी या किसी उत्पीड़न को लेकर संस्थान में कभी कोई औपचारिक या अनौपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई थी, न ही प्रबंधन को उसके किसी निजी विवाद की जानकारी थी।
जांच में जुटी पुलिस, सभी पहलुओं की गहराई से पड़ताल
जयपुर कमिश्नरेट के साउथ जोन के डीसीपी राजर्षि राज ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस पूरी निष्पक्षता और संवेदनशीलता के साथ हर तकनीकी व दस्तावेजी साक्ष्य जुटा रही है। पुलिस अब इस बिंदु पर जांच केंद्रित कर रही है कि आत्महत्या का मुख्य कारण कथित ब्लैकमेलिंग और उत्पीड़न था, निजी रिश्ते में उपजा गहरा अवसाद और पछतावा था, या फिर इन दोनों परिस्थितियों के दबाव में छात्रा ने यह आत्मघाती कदम उठाया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (सीडीआर), व्हाट्सएप चैट्स और फोरेंसिक रिपोर्ट के विश्लेषण के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।







