राजस्थान में पंचायती राज चुनावों की सरगर्मियों और दीपोत्सव के आगाज के बीच कांग्रेस संगठन से जुड़ी एक बड़ी राजनीतिक हलचल सामने आई है। साल 2023 के विधानसभा चुनाव में पार्टी से बगावत करने वाले दो पूर्व विधायकों—रामचंद्र सराधना और खिलाड़ी लाल बैरवा—की आखिरकार कांग्रेस में औपचारिक घर वापसी हो गई है। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने दोनों वरिष्ठ नेताओं को पार्टी का दुपट्टा पहनाकर पुनः संगठन की सदस्यता दिलाई।
दोनों नेता 2023 के विधानसभा चुनाव में पार्टी द्वारा टिकट न दिए जाने से नाराज होकर बागी प्रत्याशी के तौर पर चुनावी मैदान में उतर गए थे, जिसके बाद अनुशासनहीनता के आरोप में पार्टी ने उन्हें छह साल के लिए निष्कासित कर बाहर का रास्ता दिखा दिया था।
विराटनगर और बसेड़ी से लड़ा था निर्दलीय चुनाव, बिगड़े थे समीकरण
विधानसभा चुनाव 2023 में टिकट कटने के बाद दोनों नेताओं ने पार्टी के आधिकारिक प्रत्याशियों के खिलाफ ताल ठोकी थी:
-
रामचंद्र सराधना (विराटनगर): टिकट न मिलने पर सराधना ने विराटनगर विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में उन्होंने करीब 19,000 वोट हासिल किए, जिससे कांग्रेस के आधिकारिक उम्मीदवार इंद्राज गुर्जर के राजनीतिक समीकरण पूरी तरह ध्वस्त हो गए और पार्टी को उस सीट पर हार का सामना करना पड़ा।
-
खिलाड़ी लाल बैरवा (बसेड़ी): पूर्व सांसद और विधायक रहे खिलाड़ी लाल बैरवा ने धौलपुर जिले की बसेड़ी सीट से बगावत की थी। हालांकि वे कोई खास चुनावी प्रभाव नहीं छोड़ सके और महज 1,366 वोटों पर ही सिमट गए। इसके बावजूद कांग्रेस के युवा प्रत्याशी संजय जाटव वहां से मजबूत अंतर से जीत दर्ज करने में सफल रहे थे।
वापसी का लेखा-जोखा: एक नजर में
स्थानीय विरोध और दिल्ली-जयपुर की दौड़ के बाद मिली हरी झंडी
दोनों पूर्व विधायक पिछले लंबे समय से संगठन में दोबारा शामिल होने की कोशिश में जुटे थे। इसके लिए उन्होंने जयपुर प्रदेश मुख्यालय से लेकर नई दिल्ली तक पार्टी के शीर्ष रणनीतिकारों के खूब चक्कर काटे। हालांकि, दोनों ही विधानसभा क्षेत्रों के स्थानीय नेताओं और विधायकों के कड़े विरोध के चलते उनकी घर वापसी पर लगातार ब्रेक लगे हुए थे।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, दोनों नेताओं का सीमित जनाधार और पिछले चुनाव में पार्टी को नुकसान पहुंचाने के इतिहास को देखते हुए नेतृत्व पहले उनकी वापसी को लेकर बेहद सतर्क था। यही कारण रहा कि उनके निष्कासन को रद्द करने में इतना लंबा समय लगा।
बिना शर्त जॉइनिंग, भविष्य की जिम्मेदारियों पर नजर
पार्टी के अनुसार, दोनों नेताओं ने बिना किसी पूर्व शर्त के कांग्रेस का दामन थामा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी ने आगामी पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों में सांगठनिक संतुलन साधने के लिए यह कदम उठाया है, लेकिन भविष्य में इन्हें विधानसभा का टिकट मिलना आसान नहीं होगा। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि घर वापसी के बाद पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा और पार्टी नेतृत्व इन दोनों नेताओं को संगठन में क्या अहम जिम्मेदारी सौंपता है।







