राजस्थान की नौकरशाही में भारी भूचाल लाने वाले ’40 विला व कॉटेज खरीद’ प्रकरण में राज्य सरकार का शिकंजा अब और कसता जा रहा है। अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) स्तर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल को पद से हटाकर एपीओ (पदस्थापन की प्रतीक्षा में) किए जाने के बाद, अब उनकी पत्नी एवं 1995 बैच की वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी डॉ. प्रशाखा माथुर पर भी प्रशासनिक गाज गिरने की पूरी तैयारी दिख रही है। प्रशासनिक गलियारों और कार्मिक विभाग से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, इस पूरे मामले में एसीबी (भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो) स्तर पर जांच और उच्चस्तरीय समीक्षा शुरू होने के बाद प्रशाखा माथुर को भी वर्तमान पद से हटाने अथवा एपीओ किए जाने को लेकर मंथन तेज हो गया है।
क्या है पूरा मामला और क्यों आ रहा है नाम?
विवाद की मुख्य जड़ उदयपुर और अलवर में स्थित अनंता रिसॉर्ट में करीब ढाई साल के भीतर खरीदे गए 40 आलीशान विला और कॉटेज से जुड़ी है। यह पूरी संपत्ति ‘गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड’ नामक एक ही निजी कंपनी से लगभग ₹6.16 करोड़ में खरीदी गई थी। दस्तावेजों के अनुसार, इन संपत्तियों की रजिस्ट्री केवल आईएएस शिखर अग्रवाल के नाम पर ही नहीं, बल्कि उनकी आईपीएस पत्नी डॉ. प्रशाखा माथुर, उनके दोनों बेटों और सास-ससुर के नाम पर भी दर्ज कराई गई थी।
मामला तब और अधिक संदिग्ध हो गया जब यह तथ्य सामने आया कि करोड़ों रुपये की इन संपत्तियों को खरीदने के तुरंत बाद उसी कंपनी को भारी-भरकम सालाना लीज पर दे दिया गया। उदयपुर के 20 कॉटेज से सालाना ₹80 लाख और अलवर के 20 विला से ₹1 करोड़ यानी कुल मिलाकर करीब ₹1.80 करोड़ की वार्षिक लीज राशि तय की गई थी। इतनी बड़ी संख्या में संपत्तियों की थोक खरीद और उसी फर्म से भारी रिटर्न के इस वित्तीय मॉडल ने नौकरशाही और सतर्कता एजेंसियों के कान खड़े कर दिए।
सरकारी प्रोत्साहन पैकेज और संपत्ति का ब्योरा बना गले की फांस
जांच के दायरे में सबसे गंभीर बिंदु संपत्तियों की रजिस्ट्री की टाइमिंग और कंपनी को मिले सरकारी लाभ को लेकर है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक,जिस समय अलवर स्थित विला की रजिस्ट्री करवाई जा रही थी, लगभग उसी दौर में संबंधित कंपनी को राजस्थान निवेश प्रोत्साहन नीति (RIPS) के तहत विशेष कस्टमाइज्ड पैकेज व कर रियायतों के आदेश जारी हुए थे। चूंकि शिखर अग्रवाल उद्योग, रीको और निवेश संवर्धन से जुड़े शीर्ष प्रशासनिक पद संभाल रहे थे, इसलिए हितों के सीधे टकराव (Conflict of Interest) के गंभीर आरोप लगे।
इसके साथ ही, अचल संपत्ति विवरण (आईपीआर) में संपत्तियों के पूर्ण खुलासे और खरीद के वित्तीय स्रोतों को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं। चूंकि संपत्तियों के रजिस्टर्ड दस्तावेजों और पावर ऑफ अटॉर्नी में आईपीएस अधिकारी प्रशाखा माथुर के नाम पर भी कॉटेज व विला दर्ज पाए गए हैं, ऐसे में अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियमों के तहत उनकी भी समान जवाबदेही तय मानी जा रही है।
कार्मिक और गृह विभाग में सरगर्मी तेज
मुख्यमंत्री स्तर पर इस पूरे मामले का संज्ञान लिए जाने के बाद राज्य सरकार ने पहले कदम के तहत आईएएस शिखर अग्रवाल से उद्योग व रीको सहित सभी महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारियां छीनते हुए उन्हें एपीओ कर दिया था। अब चर्चा है कि मामले की निष्पक्ष जांच, एसीबी की संभावित कार्रवाई और प्रशासनिक मर्यादाओं को देखते हुए कार्मिक एवं गृह विभाग आईपीएस प्रशाखा माथुर को लेकर भी जल्द ही आदेश जारी कर सकता है। यदि ऐसा होता है, तो राजस्थान ब्यूरोक्रेसी में यह हाल के वर्षों का ऐसा पहला मामला होगा जहां इतने बड़े रियल एस्टेट लेन-देन के घेरे में आने पर एक ही परिवार के वरिष्ठ आईएएस और आईपीएस दोनों पर एक साथ प्रशासनिक कार्रवाई देखने को मिलेगी।







