गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड: 1,524 पेड़ों पर कुल्हाड़ी की तैयारी, BMC के प्रस्ताव पर उठे सवाल

मुंबई में GMLR प्रोजेक्ट के लिए 695 पेड़ काटने और 666 के पुनर्रोपण के प्रस्ताव का विरोध। वॉचडॉग फाउंडेशन ने BMC से जताई आपत्ति, हवा की गुणवत्ता बिगड़ने का खतरा।

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मुंबई में गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड (GMLR) परियोजना के तहत 1,500 से अधिक पेड़ों को प्रभावित करने वाले प्रस्ताव ने शहर के पर्यावरणविदों और आम नागरिकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस बुनियादी ढांचा परियोजना के लिए कुल 1,524 पेड़ों को चिन्हित किया गया है, जिसमें 695 पेड़ों को काटने और 666 पेड़ों के पुनर्रोपण (Transplantation) की योजना बनाई गई है। पश्चिमी और पूर्वी उपनगरों के बीच कनेक्टिविटी को सुगम बनाने के उद्देश्य से लाई जा रही इस परियोजना पर अब हरियाली और वायु गुणवत्ता के नुकसान को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

हवा की गुणवत्ता और मुंबईकरों के स्वास्थ्य पर संभावित प्रभाव

मुंबई जैसी घनी आबादी और पहले से प्रदूषण झेल रहे महानगर में वृक्ष कार्बन अवशोषण और वायु शुद्धिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जानकारों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों के हटने से स्थानीय स्तर पर तापमान में वृद्धि (Heat Island Effect) और धूल-कणों की मात्रा बढ़ सकती है। यदि क्षेत्र का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) गिरता है, तो इसका सीधा असर स्थानीय निवासियों के श्वसन तंत्र पर पड़ेगा, जिससे सांस और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। पुनर्रोपण किए जाने वाले पेड़ों के बचने की दर को लेकर भी पर्यावरण विशेषज्ञ हमेशा संशय जताते रहे हैं।

वॉचडॉग फाउंडेशन का कड़ा विरोध और वैकल्पिक योजना की मांग

इस प्रस्ताव के सार्वजनिक होते ही सामाजिक संस्था ‘वॉचडॉग फाउंडेशन’ ने बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) से इस योजना को तत्काल वापस लेने की मांग की है। फाउंडेशन के ट्रस्टी गॉडफ्रे पिमेंडा ने बीएमसी प्रशासन और पर्यावरण विभाग को औपचारिक पत्र लिखकर प्रोजेक्ट के संरेखण (Alignment) और वैकल्पिक इंजीनियरिंग विकल्पों पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। उनका तर्क है कि विकास के नाम पर प्राकृतिक सुरक्षा कवच को नष्ट करने के बजाय ऐसे तकनीकी रास्ते तलाशे जाने चाहिए जिससे कम से कम पेड़ों को नुकसान पहुंचे।

प्रशासनिक प्रक्रिया और आगामी फैसला

बीएमसी द्वारा आम नागरिकों और पर्यावरण विशेषज्ञों से आपत्तियां व सुझाव आमंत्रित किए जाने के बाद से यह विवाद और तेज हो गया है। अब सभी की निगाहें नगर निगम और ट्री अथॉरिटी के अंतिम फैसले पर टिकी हैं कि क्या जनभावनाओं और पर्यावरणीय चिंताओं को ध्यान में रखते हुए डिजाइन में बदलाव किया जाएगा, या फिर कनेक्टिविटी की गति तेज करने के लिए पेड़ों की बलि दी जाएगी।

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