राम मंदिर दान विवाद: जयराम रमेश ने पीएम मोदी, अमित शाह और सीएम योगी से चुप्पी तोड़ने की मांग की

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अयोध्या में स्थित भव्य राम मंदिर के लिए श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए गए चढ़ावे और कीमती दान में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर कांग्रेस पार्टी ने केंद्र व उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ तीखा रुख अख्तियार कर लिया है। कांग्रेस ने मंगलवार को सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस पूरे प्रकरण पर अपनी चुप्पी तोड़ने की अपील की है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस बेहद संवेदनशील और बड़े मामले में देश की जनता जवाब चाहती है। इसके साथ ही उन्होंने मांग दोहराई कि पूरे प्रकरण की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की प्रत्यक्ष निगरानी में स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए।

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी बात रखते हुए पूछा कि आखिर चंदा चोरी में कौन-कौन लोग भागीदार हैं और सरकार सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में जांच कराने से क्यों कतरा रही है? उन्होंने दावा किया कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अस्तित्व में आने के कुछ ही महीनों बाद,यानी नवंबर 2020 में एक निजी ऑडिट कंपनी ने ट्रस्ट के आंतरिक ऑडिट और जोखिम प्रबंधन को लेकर कई गंभीर खामियों को उजागर किया था। उस समय की ऑडिट रिपोर्ट में प्रबंधन के कामकाज को पूरी तरह गैर-पेशेवर करार दिया गया था और कहा गया था कि न तो जिम्मेदारियां तय हैं और न ही दान का कोई व्यवस्थित रिकॉर्ड रखा जा रहा है। इसके अलावा डेटा प्रविष्टि और लेन-देन की दोहरी या तिहरी जांच की कोई ठोस व्यवस्था तक नहीं थी।

कांग्रेस नेता ने आगे आरोप लगाया कि उस ऑडिट में बैंक खातों के मिलान, लेखांकन के लिए योग्य कर्मचारियों की अनुपलब्धता तथा आईटी डेटा की सुरक्षा और सत्यापन के पुख्ता इंतजाम न होने की बात भी सामने आई थी। रमेश ने सवाल उठाया कि जब वर्ष 2020 में ही इन सभी गंभीर खतरों की ओर स्पष्ट रूप से ध्यान आकर्षित कर दिया गया था, तो उस समय सुधारात्मक कदम क्यों नहीं उठाए गए? उन्होंने यह भी पूछा कि श्रद्धालुओं द्वारा समर्पित किए गए कीमती दान की रसीदें क्यों नहीं काटी गईं और खामियों की शिकायत करने वाले लोगों को ही जिम्मेदारी से क्यों हटा दिया गया?

जयराम रमेश ने वर्ष 2026 में गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रारंभिक रिपोर्ट का हवाला देते हुए एक और बड़ा दावा किया। उनके अनुसार,जांच में यह बात सामने आई है कि नकदी की गिनती वाले कमरे से कम से कम 105 बार नकदी निकाली गई और उस दौरान कर्मचारी कथित रूप से सीसीटीवी कैमरों के सामने आकर उन्हें ढक देते थे। इसके साथ ही उन्होंने मंदिर निर्माण से जुड़े इंजीनियर दीनानाथ वर्मा के पूर्व के आरोपों का जिक्र किया, जिन्होंने ट्रस्ट के पदाधिकारी चंपत राय को ठेकों में कथित तौर पर 40 प्रतिशत तक कमीशन लिए जाने, कागजों पर फर्जी मजदूर दर्शाने और निर्माण सामग्री के अत्यधिक बढ़ा-चढ़ाकर बिल बनाने की औपचारिक शिकायत की थी।

रमेश के अनुसार, दीनानाथ वर्मा द्वारा उठाई गई शिकायतों पर निष्पक्ष कार्रवाई करने के बजाय उल्टा उन्हें ही उनके पद से हटा दिया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि जांच के दौरान कई ऐसी बेशकीमती वस्तुएं सामने आई हैं, जिनके लिए दानदाताओं को कभी कोई आधिकारिक रसीद ही जारी नहीं की गई थी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश की आम जनता को अब सरकारी एसआईटी की सामान्य जांच पर भरोसा नहीं रहा है, क्योंकि केवल कुछ निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई करके इतने बड़े मामले को रफा-दफा नहीं किया जा सकता।

कांग्रेस महासचिव ने जोर देकर कहा कि ऑडिट चेतावनियों की अनदेखी, ठेकों में कमीशनखोरी, दान में हेराफेरी और प्रत्येक कीमती वस्तु का पाई-पाई का हिसाब जनता के सामने आना जरूरी है। उन्होंने अंत में कहा कि राम के नाम पर देश-विदेश से भेजे गए चढ़ावे का हिसाब पूरा देश मांग रहा है। श्रद्धालुओं द्वारा भगवान के प्रति दिखाई गई अगाध आस्था का हवाला देकर किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति या ट्रस्टी को पारदर्शिता और कानूनी जवाबदेही से बचने का अधिकार कतई नहीं दिया जा सकता।

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