इजरायल में नई संसद (नेसेट) के गठन के लिए हुए मतदान की मतगणना अब अपने अंतिम और बेहद नाजुक पड़ाव पर पहुंच चुकी है। चुनावी नतीजों के शुरुआती रुझानों और ताजा आंकड़ों के बीच पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान सामने आया है। ट्रंप ने इजरायली चुनावों के ताजा रुझानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की स्थिति अब चुनावी दौड़ में काफी मजबूत नजर आ रही है। इसके साथ ही उन्होंने यह दावा भी किया कि नेतन्याहू के इस राजनीतिक उभार में उनके खुले समर्थन की अहम भूमिका रही है।
शुरुआती झटके के बाद नेतन्याहू की मजबूत वापसी
समाचार वेबसाइट ‘एक्सिओस’ को दिए एक साक्षात्कार में डोनाल्ड ट्रंप ने खुलासा किया कि मतदान खत्म होने के तुरंत बाद उन्हें नेतन्याहू के नतीजों को लेकर काफी नकारात्मक और निराशाजनक संकेत मिले थे। ऐसा लग रहा था कि मौजूदा प्रधानमंत्री सत्ता से पूरी तरह बेदखल हो जाएंगे।
ट्रंप ने कहा, “मैंने सुना है कि मेरे सार्वजनिक समर्थन से नेतन्याहू को चुनावी मैदान में काफी बड़ा फायदा पहुंचा है। शुरुआत में हमें जो खबरें मिल रही थीं,वे उनके लिए बेहद खराब थीं, लेकिन ताजा अनुमानों और आंकड़ों को देखें तो इजरायली प्रधानमंत्री की स्थिति अब काफी बेहतर और मजबूत दिख रही है।”
इससे पहले ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर भी एक पोस्ट साझा कर नेतन्याहू के इस प्रदर्शन का श्रेय खुद को दिया था। उन्होंने दावा किया था कि चुनाव से ऐन पहले दिए गए उनके बयानों ने इजरायली मतदाताओं के रुख को बदल दिया। ट्रंप के अनुसार, जिस चुनाव में नेतन्याहू की करारी हार लगभग तय मानी जा रही थी, वह अब बेहद कड़े और अप्रत्याशित मुकाबले में तब्दील हो चुका है, जहां से नेतन्याहू की जीत की संभावनाएं भी जीवित हो गई हैं।
93 फीसदी वोटों की गिनती पूरी: किसी को बहुमत नहीं
इजरायल के केंद्रीय चुनाव आयोग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अब तक लगभग 93 प्रतिशत मतों की गिनती पूरी की जा चुकी है। अब तक सामने आए नतीजों में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का दक्षिणपंथी गुट अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वी और पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइसेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन से आगे निकल गया है।
हालांकि, रुझानों से यह भी स्पष्ट है कि 120 सदस्यीय इजरायली संसद ‘नेसेट’ में सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 सीटों के जादुई आंकड़े तक फिलहाल कोई भी गठबंधन सीधे तौर पर पहुंचता नहीं दिख रहा है।
ताजा अनुमानों के मुताबिक:
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नेतन्याहू का गठबंधन: लगभग 53 सीटें जीतने की स्थिति में दिखाई दे रहा है। हालांकि यह आंकड़ा उनके पास पहले से मौजूद सीटों की तुलना में 11 कम है, फिर भी वह सबसे बड़े गुट के रूप में उभरते दिख रहे हैं।
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गादी आइसेनकोट का गठबंधन: विपक्षी गठबंधन को 48 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है, जो शुरुआती एग्जिट पोल के अनुमानों से थोड़ा कम है।
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अरब पार्टियां: इस चुनाव में सबसे बड़ा उलटफेर अरब दलों की ओर से देखने को मिला है, जिनके खाते में रिकॉर्ड 19 सीटें जाने का अनुमान है। इजरायल के चुनावी इतिहास में अरब पार्टियों का यह प्रदर्शन अप्रत्याशित माना जा रहा है।
5 लाख ‘डबल एनवलप’ वोटों पर टिकी अंतिम उम्मीदें
ट्रंप का यह बयान और इजरायल की राजनीतिक हलचल ऐसे समय में तेज हुई है, जब चुनाव आयोग को अभी भी लगभग 5 लाख मतों की गिनती पूरी करनी बाकी है। इजरायल में इन मतों को तकनीकी रूप से ‘डबल एनवलप’ वोट कहा जाता है।
इन 5 लाख वोटों में मुख्य रूप से शामिल हैं:
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सीमा पर और छावनियों में तैनात इजरायली रक्षा बलों (आईडीएफ) के सैनिक
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विदेशों में तैनात इजरायली राजनयिक और दूतावास कर्मी
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जेलों में बंद कैदी और अस्पताल में भर्ती मरीज
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वे नागरिक जिन्होंने अपने निर्धारित मतदान केंद्र के बजाय अन्य विशेष बूथों पर मतदान किया
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यद्यपि इन सैनिकों और राजनयिकों के मतों से सीटों की संख्या में कुछ फेरबदल हो सकता है और नेतन्याहू के दक्षिणपंथी ब्लॉक को एक या दो सीटों का अतिरिक्त लाभ मिल सकता है, लेकिन इससे कुल राजनीतिक शक्ति संतुलन में किसी बहुत बड़े बदलाव की संभावना कम ही है। संसद में त्रिशंकु स्थिति बनने की आशंका सबसे अधिक नजर आ रही है।
सरकार गठन की जटिल राह और अंतरराष्ट्रीय प्रभाव
इजरायल में राजनीतिक स्थिरता पिछले कुछ वर्षों से एक गंभीर चुनौती बनी हुई है। यदि अंतिम परिणाम भी मौजूदा रुझानों के अनुरूप ही रहते हैं, तो देश में एक बार फिर सरकार गठन को लेकर लंबी और जटिल सौदेबाजी का दौर शुरू होगा। 61 का आंकड़ा जुटाने के लिए नेतन्याहू और आइसेनकोट दोनों को ही छोटे दलों और निर्दलीय सांसदों के समर्थन की सख्त दरकार होगी।
यदि दोनों में से कोई भी गुट आवश्यक बहुमत जुटाने में नाकाम रहता है, तो देश को एक बार फिर मध्यावधि चुनाव का सामना करना पड़ सकता है। इस पूरी खींचतान के बीच डोनाल्ड ट्रंप के बयानों ने यह साफ कर दिया है कि इजरायल की आंतरिक राजनीति और नेतन्याहू के राजनीतिक भविष्य पर अमेरिकी राजनीतिक समीकरणों की गहरी छाया बनी हुई है। आने वाले कुछ घंटे यह तय करेंगे कि नेतन्याहू सत्ता में बने रहने के लिए जरूरी गठबंधन बना पाते हैं या इजरायल एक और राजनीतिक गतिरोध की ओर बढ़ता है।







