दीपावली महापर्व से ठीक पहले खरीदारी के लिए महाशुभ माने जाने वाले ‘पुष्य नक्षत्र’ के अवसर पर कवर्धा के बाजारों में मिला-जुला और असमान असर देखने को मिला। अमूमन इस शुभ दिन पर सोने-चांदी के साथ वाहन, बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक्स और कपड़ों की जमकर खरीदारी होती है, लेकिन इस बार बाजार की रौनक सभी क्षेत्रों में एक जैसी नहीं रही। पिछले दिनों सोने-चांदी की कीमतों में आई तेज गिरावट ने सराफा बाजार को तो भरपूर गति दी,लेकिन ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों के पास नकदी (लिक्विडिटी) के अभाव के चलते ऑटोमोबाइल, बर्तन, कपड़ा और इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार पूरी तरह फीके नजर आए। अधिकांश दुकानों में ग्राहकों की आवाजाही सामान्य दिनों की तरह ही सीमित रही।
तीन हजार रुपए तक सस्ता हुआ सोना, सराफा में उमड़े ग्राहक
पुष्य नक्षत्र पर सराफा बाजार में लौटी रौनक की सबसे बड़ी वजह हाल ही में कीमती धातुओं के दामों में आई नरमी रही। कुछ दिन पहले तक 20 कैरेट सोने का भाव ₹1,22,500 प्रति 10 ग्राम था, जो घटकर ₹1,19,500 पर आ गया, यानी सीधे ₹3,000 प्रति 10 ग्राम की बड़ी राहत मिली। वहीं 22 कैरेट सोने की कीमत भी ₹1,34,000 से घटकर ₹1,30,500 प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई। चांदी के बाजार में भी भारी गिरावट देखने को मिली; एक सप्ताह पहले की तुलना में चांदी करीब ₹10,000 सस्ती होकर ₹1,60,000 प्रति किलोग्राम पर आ गई। सराफा व्यापारी सूचित बोथरा के अनुसार,कीमतों में आई इस कमी से ग्राहकों का आकर्षण बढ़ा और लोगों ने शुभ मुहूर्त में आभूषणों व सिक्कों की अच्छी बुकिंग और खरीदारी की।
ऑटोमोबाइल और कार बाजार में पसरा सन्नाटा
सराफा के ठीक उलट ऑटोमोबाइल सेक्टर में पुष्य नक्षत्र का कोई खास असर दिखाई नहीं दिया। दोपहिया और चारपहिया वाहन डीलरशिप्स ग्राहकों की राह देखती रहीं। ऑटोमोबाइल डीलर अंकित अग्रवाल ने बताया कि पिछले साल ग्राहकों को मिले जीएसटी लाभ और बेहतर नकदी प्रवाह के मुकाबले इस बार बाजार काफी सुस्त रहा। वहीं कार शोरूम मैनेजर आशीष पाण्डेय का कहना था कि चारपहिया वाहन खरीदना एक बड़ा निवेश होता है। चूंकि कवर्धा की अर्थव्यवस्था काफी हद तक खेती-किसानी से जुड़ी है और वर्तमान में किसानों के पास नकदी की कमी है, इसलिए शोरूमों में पूछताछ और डिलीवरी दोनों सामान्य दिनों जैसी ही रहीं।
बर्तन, कपड़ा और इलेक्ट्रॉनिक्स में भी उत्साह की कमी
पुष्य नक्षत्र पर बर्तन और गृहस्थी का सामान खरीदने की पुरानी परंपरा के बावजूद बर्तन बाजार में भी मायूसी छाई रही। बर्तन व्यापारी मोहित माहेश्वरी ने बताया कि दुकानों में ग्राहकों की वह भीड़ नहीं दिखी जिसकी हर साल उम्मीद की जाती है। यही स्थिति कपड़ा और इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबार में भी रही,जहां लोगों ने केवल अत्यंत जरूरी वस्तुओं की ही सीमित खरीदारी की और महंगे गैजेट्स या बड़ी खरीदारी से दूरी बनाए रखी।
धान की उपज बिकने के बाद बाजार में तेजी की उम्मीद
स्थानीय व्यापारियों का स्पष्ट कहना है कि कवर्धा की क्रयशक्ति मुख्य रूप से कृषि पर टिकी हुई है। खेतों में धान की फसल पककर तैयार है, लेकिन सरकारी खरीदी और उपज की बिक्री का पैसा अभी किसानों के खातों या हाथों में नहीं पहुंचा है। जब तक धान बिकने के बाद किसानों की जेब में नकदी नहीं आएगी, तब तक बड़े निवेश वाले बाजारों में तेजी आना मुश्किल है। व्यापारियों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में धान का भुगतान शुरू होने के बाद धनतेरस और दीपावली के मौके पर बाजार एक बार फिर पूरी क्षमता से रफ्तार पकड़ेगा।







