वैश्विक गिरावट के बीच भारतीय शेयर बाजार में तेजी: निफ्टी 24,000 के पार, 26,500 का नया लक्ष्य

वैश्विक बाजारों में सुस्ती के बावजूद भारतीय बाजार में जोरदार तेजी दर्ज की गई। जानिए निफ्टी और बैंक निफ्टी के अहम रेजिस्टेंस, सपोर्ट लेवल्स और आगामी कारोबारी रणनीति।

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बीते सप्ताह भारतीय शेयर बाजार ने एक बार फिर अपनी आंतरिक मजबूती और संरचनात्मक स्थिरता का लोहा मनवाया है। ऐसे समय में जब अमेरिकी और एशियाई बाजारों समेत अधिकांश प्रमुख वैश्विक सूचकांक तेज बिकवाली और मंदी के दबाव से जूझ रहे हैं, घरेलू संस्थागत निवेशकों और खुदरा भागीदारी के दम पर भारतीय इक्विटी बेंचमार्क ने शानदार तेजी दर्ज की। वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों में अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक सुस्ती के संकेतों के बावजूद घरेलू बाजार का यह उलटफेर दर्शाता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के बुनियादी घटक विदेशी झटकों को झेलने में पूरी तरह सक्षम हैं। बाजार के जानकारों का मानना है कि यह उछाल केवल अल्पकालिक सट्टा नहीं, बल्कि मजबूत कॉरपोरेट अर्निंग्स और निरंतर पूंजी प्रवाह की बुनियाद पर टिका हुआ है।

निफ्टी 50 में बुलिश रेंज ब्रेकआउट और मजबूत मोमेंटम

तकनीकी चार्ट्स पर निफ्टी 50 का व्यवहार पूरी तरह से पूर्व अनुमानों के अनुरूप रहा है। सूचकांक ने अपने पुराने कंसॉलिडेशन दायरे को तोड़ते हुए एक निर्णायक ‘बुलिश रेंज ब्रेकआउट’ दर्ज किया। बाजार के अधिकांश विश्लेषक जहां 24,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर पर कड़े प्रतिरोध की आशंका जता रहे थे, वहीं निफ्टी ने इस आंकड़े को न केवल पार किया बल्कि इसके काफी ऊपर जाकर एक मजबूत क्लोजिंग दर्ज की। दैनिक और साप्ताहिक चार्ट्स पर रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) और मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस (MACD) जैसे प्रमुख तकनीकी इंडिकेटर्स स्पष्ट रूप से संकेत दे रहे हैं कि बाजार में खरीदारी का मोमेंटम बेहद सशक्त है। बाजार की चौड़ाई यानी एडवांस-डिक्लाइन रेशियो भी सकारात्मक बना हुआ है, जिससे यह साफ होता है कि तेजी केवल चुनिंदा हैवीवेट शेयरों तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक बाजार भी इसमें सक्रिय भागीदारी निभा रहा है।

अल्पकालिक करेक्शन की संभावना और अहम सपोर्ट स्तर

मजबूत रुझान के बावजूद तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि एकतरफा तेजी के बाद बाजार में स्वस्थ करेक्शन या मुनाफावसूली का आना स्वाभाविक और आवश्यक होता है। वर्तमान स्तरों पर निफ्टी को 25,050 के आसपास एक कड़े प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) का सामना करना पड़ सकता है। यदि सूचकांक इस स्तर से ऊपर टिकने में तात्कालिक रूप से असमर्थ रहता है, तो आगामी कारोबारी सत्रों में हल्की गिरावट देखने को मिल सकती है। इस संभावित पुलबैक के दौरान नीचे की ओर 24,600 और उसके बाद 24,300 का स्तर मजबूत सपोर्ट जोन के रूप में काम करेगा। बाजार के लिए 24,300 का आधार बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है; जब तक निफ्टी इस स्तर के ऊपर बना रहता है, तब तक दीर्घकालिक तेजी के ढांचे पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। यह संभावित करेक्शन घबराने के बजाय उन निवेशकों के लिए एक नया अवसर बनेगा जो मौजूदा रैली में प्रवेश करने से चूक गए थे।

लंबी अवधि का लक्ष्य 26,500: तेजी के नए दौर की रूपरेखा

यदि निफ्टी 24,600 या 24,300 के सपोर्ट स्तरों पर स्थिर होकर दोबारा 25,050-25,100 के दायरे को पार करने में सफल रहता है, तो तकनीकी आधार पर तेजी का एक नया और अधिक आक्रामक चरण शुरू होगा। मध्यवर्ती चार्ट्स पर बनने वाले फिबोनाची एक्सटेंशन और प्राइस एक्शन पैटर्न्स यह संकेत दे रहे हैं कि अगले कुछ महीनों में निफ्टी 50 का अंतिम लक्ष्य 26,500 तक हो सकता है। इस संभावित यात्रा में बुनियादी ढांचा, बैंकिंग,ऑटोमोबाइल और पूंजीगत सामान (कैपिटल गुड्स) से जुड़े सेक्टर्स मुख्य भूमिका निभाते नजर आएंगे। बाजार की यह संरचना स्पष्ट करती है कि किसी भी गिरावट को मंदी की शुरुआत मानने के बजाय ‘अपट्रेंड में कंसॉलिडेशन’ के रूप में देखा जाना चाहिए।

बैंक निफ्टी का तकनीकी रुख: 59,700 पर रुकावट और 61,500 की राह

निफ्टी की इस ऐतिहासिक तेजी को गति देने में बैंकिंग सेक्टर की भूमिका सबसे अग्रणी रही है। बैंक निफ्टी इंडेक्स ने भी हाल के सत्रों में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। हालांकि, तकनीकी दृष्टिकोण से बैंक निफ्टी फिलहाल 59,700 के कड़े रेजिस्टेंस के बेहद करीब है। विश्लेषकों के अनुसार, इस स्तर पर पहुंचने के बाद इंडेक्स में मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है, जिससे यह फिसलकर 57,800 से 57,700 के दायरे में आ सकता है। यह 57,700-57,800 का स्तर बैंक निफ्टी के लिए एक अत्यंत मजबूत डिमांड जोन साबित होगा। एक बार जब इंडेक्स इस सपोर्ट स्तर से कंसॉलिडेट होकर नई छलांग लगाएगा, तो अगला बुलिश वेव बैंक निफ्टी को 61,500 के सर्वकालिक उच्च स्तर की ओर अग्रसर कर सकता है। प्राइवेट और सरकारी दोनों बैंकों की मजबूत बैलेंस शीट इस तेजी को ठोस सहारा प्रदान कर रही हैं।

ट्रेडर्स और निवेशकों के लिए व्यावहारिक रणनीति

मौजूदा बाजार परिदृश्य को देखते हुए सबसे व्यावहारिक रणनीति ‘बाय ऑन डिप्स’ (गिरावट पर खरीदारी) की प्रतीत होती है। 25,050 और 59,700 के निकटवर्ती रेजिस्टेंस स्तरों पर नए लॉन्ग पोजीशन बनाने के बजाय समझदारी इसी में होगी कि ट्रेडर 24,600-24,300 (निफ्टी) और 57,800 (बैंक निफ्टी) के पुलबैक का इंतजार करें। इसके साथ ही, निवेशकों को वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) के रुख पर भी बारीक नजर रखनी चाहिए। सेक्टर रोटेशन के आधार पर मजबूत फंडामेंटल वाले मिडकैप और लार्जकैप शेयरों में चरणबद्ध निवेश लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न दे सकता है।

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