नीमकाथाना में रूप चौदस पर ब्यूटी पार्लरों में उमड़ी महिलाओं की भीड़: 150 पार्लरों में 2000 से ज्यादा ने कराया मेकओवर

नीमकाथाना में रूप चौदस पर महिलाओं और युवतियों में रूप निखारने की होड़ दिखी। 150 से अधिक ब्यूटी पार्लरों में फेशियल, एचडी मेकअप और वैक्सिंग के लिए महिलाओं की भारी भीड़ जुटी।

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नीमकाथाना: पांच दिवसीय दीपोत्सव के अंतर्गत धनतेरस के अगले दिन मनाए जाने वाले ‘रूप चौदस’ (नरक चतुर्दशी) के पावन अवसर पर नीमकाथाना शहर के ब्यूटी पार्लरों में महिलाओं और युवतियों की जबरदस्त भीड़ देखने को मिली। परंपरा के अनुसार शारीरिक सौंदर्य और रूप निखारने के इस खास दिन पर खुद को संवारने के लिए सुबह से ही पार्लरों में ग्राहकों का तांता लगा रहा।

शहर भर में संचालित 150 से अधिक छोटे-बड़े ब्यूटी पार्लरों में अनुमानित रूप से 2,000 से ज्यादा महिलाएं और युवतियां सेवाएं लेने पहुंचीं। त्योहार की चमक और पारिवारिक आयोजनों की तैयारी के चलते पार्लरों में पैर रखने की जगह नहीं थी और संचालकों को पहले से की गई बुकिंग के आधार पर सेवाएं देनी पड़ीं।

फेशियल, वैक्सिंग से लेकर एचडी और राजस्थानी मेकअप का क्रेज

रूप चौदस के दिन महिलाओं ने त्वचा की देखभाल और सौंदर्य वृद्धि के लिए विभिन्न प्रकार की सेवाएं लीं। किसी ने फेशियल और क्लीनअप के जरिए चेहरे पर चमक पाई, तो किसी ने वैक्सिंग और मेनिक्योर-पेडिक्योर कराया।

स्थानीय ब्यूटी एक्सपर्ट सुनीता चौधरी ने बताया कि इस बार महिलाओं में आधुनिक और पारंपरिक दोनों प्रकार के मेकअप को लेकर खासा उत्साह देखा गया। महिलाओं ने मुख्य रूप से:

  • एचडी मेकअप (HD Makeup)

  • एयरब्रश मेकअप (Airbrush Makeup)

  • ग्लॉसी मेकअप (Glossy Look)

  • पार्टी वियर और पारंपरिक राजस्थानी रजवाड़ी मेकअप

करवाने में अधिक रुचि दिखाई। त्योहार के मौके पर पारंपरिक परिधानों के साथ मेल खाता राजस्थानी लुक युवतियों की पहली पसंद बना रहा।

धार्मिक मान्यता और रूप निखारने की परंपरा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, रूप चौदस के दिन शारीरिक शुद्धि और रूप संवारने का विशेष महत्व माना गया है। प्राचीन समय में जहां महिलाएं ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पारंपरिक उबटन लगाकर स्नान करती थीं, वहीं आधुनिक दौर में यह परंपरा घरेलू नुस्खों के साथ-साथ ब्यूटी पार्लरों के आधुनिक मेकओवर तक विस्तार ले चुकी है।

इसी पावन चतुर्दशी तिथि के दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अत्याचारी राक्षस नरकासुर का संहार कर 16 हजार कन्याओं को उसके बंदीगृह से मुक्ति दिलाई थी, जिसके उपलक्ष्य में इसे ‘नरक चौदस’ या ‘नरक निवारण चतुर्दशी’ के रूप में भी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है।

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