देश में छात्रों, युवाओं और विभिन्न जनसंगठनों द्वारा समय-समय पर किए जाने वाले लोकतांत्रिक विरोध-प्रदर्शनों को अक्सर ‘विदेशी ताकतों की साजिश’ या ‘बाहरी फंडिंग’ से जोड़ने वाली भारतीय जनता पार्टी अब अपने ही एक शीर्ष नेता के बयान को लेकर चौतरफा घिर गई है। राजस्थान भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष और राज्यसभा सांसद मदन राठौड़ द्वारा पाकिस्तान का साथ देने संबंधी दिए गए एक बयान ने राष्ट्रीय राजनीति में भूचाल ला दिया है। इस बयान के बाद कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) समेत तमाम विपक्षी दलों ने भाजपा पर सीधा हमला बोलते हुए तंज कसा है कि भारत में हो रहे जन-आंदोलनों के पीछे किसी विदेशी ताकतवर व्यक्ति का हाथ नहीं है, बल्कि खुद भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ की जुबान पर पाकिस्तान का साथ देने की बात आ रही है।
क्या था मदन राठौड़ का वह बयान जिससे मचा बवाल?
यह पूरा सियासी विवाद उस समय खड़ा हुआ जब राजस्थान भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए इस वीडियो में मदन राठौड़ यह कहते हुए सुने गए कि, “हमें यह बात समझनी होगी कि जब बात हिंदुस्तान की आती है… अगर आज अमेरिका और पाकिस्तान के बीच कुछ होता है (युद्ध या टकराव की स्थिति बनती है), तो हम पाकिस्तान के साथ खड़े होंगे क्योंकि वह हमारा पड़ोसी है। हां, जब हमारे आपस की बात होगी, तब हम अपने भारत के साथ खड़े होंगे।”
एक तरफ जहां भाजपा का शीर्ष नेतृत्व हर चुनाव और राजनीतिक मंच से पाकिस्तान को आतंकवाद का पनाहगाह बताकर जीरो टॉलरेंस की नीति का दावा करता है, वहीं दूसरी ओर पार्टी के एक प्रदेशाध्यक्ष द्वारा अमेरिका की तुलना में पाकिस्तान को ‘पड़ोसी’ बताकर उसका साथ देने की बात कहने से राजनीतिक गलियारों में तीव्र प्रतिक्रिया शुरू हो गई।
विपक्ष का पलटवार: “जनता के आंदोलन में विदेशी हाथ खोजने वालों का अपना सच आया सामने”
मदन राठौड़ के इस बयान ने विपक्ष को भाजपा के ‘राष्ट्रवाद’ और ‘विदेशी साजिश’ वाले नैरेटिव की हवा निकालने का सबसे बड़ा हथियार दे दिया है। गौरतलब है कि कुछ समय पहले ही जब दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों में छात्रों व युवाओं का आंदोलन चल रहा था, तब मदन राठौड़ और भाजपा के कई नेताओं ने उन प्रदर्शनों के पीछे दुबई, कुवैत और बांग्लादेश जैसी विदेशी जगहों से फंडिंग होने और ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ का हाथ होने का आरोप लगाया था।
अब विपक्ष ने इसी मुद्दे को पलटते हुए भाजपा को कटघरे में खड़ा किया है। विपक्षी नेताओं और छात्र संगठनों का कहना है कि जब देश का युवा रोजगार, परीक्षा सुधार या संवैधानिक अधिकारों के लिए सड़क पर उतरता है, तो भाजपा को उसमें ‘विदेशी ताकतवर ताकतों का हाथ’ नजर आता है। लेकिन आज हकीकत यह सामने आई है कि देश के आंदोलनों के पीछे किसी विदेशी ताकत का हाथ नहीं है, बल्कि खुद भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष के बयानों के पीछे पाकिस्तान के प्रति सहानुभूति और उसका साथ देने की सोच झलक रही है।
कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने पूछा— “अब कहां गया भाजपा का राष्ट्रवाद?”
इस वायरल वीडियो को साझा करते हुए कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से सीधा सवाल पूछा है। आम आदमी पार्टी ने आधिकारिक तौर पर बयान जारी कर कहा कि, “जब देश की जनता सवाल पूछे तो उन्हें पाकिस्तानी कह दिया जाता है, जब युवा अपने हक के लिए आवाज उठाए तो उन्हें आतंकवादी या विदेशी एजेंट बता दिया जाता है! लेकिन जब भाजपा का अपना प्रदेशाध्यक्ष पाकिस्तान के साथ खड़े होने की बात करे, तो मोदी जी का राष्ट्रवाद कहां चला जाता है?”
वहीं, कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. शमा मोहम्मद और संदीप गुप्ता समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने मदन राठौड़ के बयान को ‘राष्ट्रविरोधी’ करार दिया है। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि जो पाकिस्तान हमारे सैनिकों और निर्दोष नागरिकों पर आतंकी हमले करवाता है, क्या संकट के समय भाजपा उसके साथ खड़ी होगी? विपक्ष ने मांग की है कि दूसरों को देशभक्ति का प्रमाण पत्र बांटने वाली भाजपा बताए कि वह मदन राठौड़ के खिलाफ क्या अनुशासनात्मक कार्रवाई कर रही है।
बैकफुट पर आए मदन राठौड़: “युद्ध नहीं, क्रिकेट मैच के संदर्भ में कही थी बात”
चौतरफा घिरने और मामला राष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ने के बाद भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ तुरंत बचाव की मुद्रा में आ गए और उन्होंने सफाई जारी की। राठौड़ ने अपने बयान पर कायम रहने के बजाय यह दावा किया कि उनके भाषण के मात्र 8 से 10 सेकंड के हिस्से को काटकर और संदर्भ से हटाकर (Out of Context) एक साजिश के तहत वायरल किया गया है।
अपनी सफाई में मदन राठौड़ ने कहा कि, “मेरी बात किसी युद्ध को लेकर बिल्कुल नहीं थी, बल्कि वह पूरी चर्चा केवल एक क्रिकेट मैच के संदर्भ में थी। पाकिस्तान के साथ हमारा संबंध दुश्मनी जैसा ही है क्योंकि वह आतंकवाद को पालता है और हमारे देश के खिलाफ साजिश रचता है। ऐसे देश के साथ हम कैसे खड़े हो सकते हैं? मेरी बात को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है।”
सियासी निहितार्थ: अपने ही जाल में फंसी भाजपा
भले ही मदन राठौड़ और वरिष्ठ भाजपा नेता राजेंद्र राठौड़ इस बयान को क्रिकेट मैच का उदाहरण बताकर डैमेज कंट्रोल की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तीर कमान से निकल चुका है। जिस तरह से सत्ता पक्ष हर जन-आंदोलन, किसान प्रदर्शन या छात्र आक्रोश को विदेशी फंडिंग और देश-विरोधी ताकतों से जोड़कर खारिज करने की रणनीति अपनाता रहा है, मदन राठौड़ की इस एक जुबानी फिसलन ने विपक्ष को यह साबित करने का मौका दे दिया है कि राष्ट्रवाद के नारे केवल दूसरों पर राजनीतिक हमला करने के लिए हैं, जबकि खुद के नेताओं के लिए मापदंड पूरी तरह अलग हैं।







