चार प्रमुख राज्यों उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक की कुल 28 विधान परिषद (एमएलसी) सीटों पर हुए चुनावों के लिए मतगणना मंगलवार सुबह 8 बजे से पूरी सतर्कता और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच जारी है। इन सभी राज्यों में स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों से खाली हुई सीटों पर जनप्रतिनिधि चुनने के लिए मतदान कराया गया था। सुबह से ही मतगणना केंद्रों पर सुरक्षाबलों की भारी तैनाती की गई है और प्रत्याशियों के एजेंटों की मौजूदगी में मतपेटियों को खोलकर मतपत्रों की छंटनी और गिनती की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। शुरुआती रुझानों के सामने आते ही राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं और विभिन्न दलों के नेता अपनी-अपनी जीत का दावा पेश कर रहे हैं।
उत्तर प्रदेश की 11 विधान परिषद सीटों पर सबसे दिलचस्प और कड़ा राजनीतिक संग्राम देखने को मिल रहा है, जिनमें 5 स्नातक और 6 शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। राज्य में मुख्य मुकाबला सीधे तौर पर सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी और मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के बीच सिमटता नजर आ रहा है। दोनों ही पार्टियां इस चुनाव को अपनी जमीनी पकड़ और बौद्धिक वर्ग के समर्थन के लिटमस टेस्ट के रूप में देख रही हैं। शुरुआती रुझानों से स्पष्ट हो रहा है कि सपा कई सीटों पर भाजपा को बेहद कड़ी टक्कर दे रही है, जिससे मुकाबले का रोमांच बढ़ गया है।
उत्तर प्रदेश की प्रमुख हॉट सीटों पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। लखनऊ स्नातक सीट पर भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार अवनीश कुमार सिंह और समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी कांति सिंह के बीच बेहद करीबी मुकाबला चल रहा है। दोनों प्रत्याशियों के बीच मतों का अंतर काफी कम बना हुआ है। इसी प्रकार गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भी भाजपा के ध्रुव त्रिपाठी और सपा के डॉ. संजयन त्रिपाठी के बीच जोरदार आमने-सामने की टक्कर जारी है। वहीं आगरा स्नातक सीट पर भी स्थिति बेहद रोचक बनी हुई है, जहां भाजपा के डॉ. मानवेन्द्र प्रताप सिंह और सपा के आकाश अग्रवाल एक-दूसरे को पछाड़ते दिख रहे हैं। एक ओर जहां भाजपा नेता सभी 11 सीटों पर क्लीन स्वीप करने का भरोसा जता रहे हैं, वहीं समाजवादी पार्टी का दावा है कि पुरानी पेंशन, बेरोजगारी और शिक्षकों-स्नातकों के स्थानीय मुद्दों के चलते जनता उनके पक्ष में मतदान कर रही है।
कर्नाटक में 4 विधान परिषद सीटों के लिए मतगणना का दौर जारी है, जिनमें 2 स्नातक और 2 शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। यहां मुकाबला सीधे तौर पर राज्य की सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी एवं जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) गठबंधन के बीच केंद्रित है। दक्षिण भारत के इस महत्वपूर्ण राज्य में विधानसभा चुनाव के बाद यह मुकाबला दोनों ही खेमों के लिए अपनी साख का सवाल बन चुका है। शुरुआती रुझानों में कांग्रेस और भाजपा-जेडीएस गठबंधन के प्रत्याशी बारी-बारी से बढ़त बनाते दिख रहे हैं, जिससे किसी भी दल के लिए एकतरफा बढ़त का अनुमान लगाना कठिन बना हुआ है।
बिहार की 8 सीटों पर भी मतगणना लगातार जारी है, जिसमें 4 स्नातक और 4 शिक्षक क्षेत्र आते हैं। बिहार का यह चुनाव इस बार बेहद खास और त्रिकोणीय बन चुका है, क्योंकि यहां राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए जिसमें भाजपा और जदयू शामिल हैं) तथा महागठबंधन के पारंपरिक मुकाबले के बीच प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने भी पूरी ताकत से ताल ठोकी है। जन सुराज पार्टी के मैदान में मजबूती से उतरने से कई सीटों पर पारंपरिक वोट समीकरण बिगड़ते दिख रहे हैं। विशेष रूप से पटना स्नातक सीट पर जन सुराज के प्रत्याशी अनुज सिंह और एनडीए उम्मीदवार के बीच बेहद कांटे का मुकाबला चल रहा है, जिसने राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान आकर्षित किया है।
महाराष्ट्र की 5 विधान परिषद सीटों पर भी मुकाबला बेहद कड़ा और प्रतिष्ठापूर्ण बन गया है। राज्य की नागपुर, पुणे और छत्रपति संभाजीनगर स्नातक सीटों के साथ-साथ पुणे और अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों पर सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन और विपक्षी महाविकास अघाड़ी के बीच सीधी राजनीतिक भिड़ंत चल रही है। दोनों ही गठबंधनों के लिए यह परिणाम आगामी राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शिक्षक और स्नातक मतदाताओं के मिजाज को समझने के लिए दोनों खेमों के रणनीतिकार मतगणना केंद्रों के बाहर पल-पल के आंकड़ों पर नजर बनाए हुए हैं।
विधान परिषद चुनावों की मतगणना प्रणाली सामान्य विधानसभा या लोकसभा चुनावों की इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) प्रक्रिया से पूरी तरह भिन्न होती है। यहां मतपत्रों (बैलेट पेपर) के जरिए मतदान कराया जाता है और नतीजे वरीयता क्रम (प्रेफरेंशियल वोटिंग सिस्टम) के आधार पर तय होते हैं। इसके तहत पहले राउंड में प्रथम वरीयता के वोटों की गिनती होती है और यदि किसी प्रत्याशी को निर्धारित कोटा प्राप्त नहीं होता है, तो द्वितीय एवं तृतीय वरीयता के मतों की गणना की जाती है। इस जटिल और विस्तृत प्रक्रिया के कारण सभी सीटों के अंतिम और आधिकारिक नतीजे आने में दोपहर बाद या देर शाम तक का समय लग सकता है। फिलहाल रुझानों के अनुसार उत्तर प्रदेश में सपा और भाजपा, तथा कर्नाटक में कांग्रेस और भाजपा के बीच मुकाबला बराबरी पर टिका हुआ है।







