ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा की शानदार जीत पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें हार्दिक बधाई दी है। चुनावी नतीजों के सामने आने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया के माध्यम से एक विशेष संदेश साझा करते हुए लूला को अपना ‘प्रिय मित्र’ बताया। अपने बधाई संदेश में पीएम मोदी ने लूला के पुनर्निर्वाचन की सराहना की और दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे द्विपक्षीय संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाने की इच्छा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वह भारत और ब्राजील के बीच बहुआयामी रणनीतिक साझेदारी को और अधिक गहरा, मजबूत और व्यापक बनाने के लिए राष्ट्रपति लूला के साथ मिलकर काम करने के लिए उत्सुक हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में दोनों देशों के वैश्विक उत्तरदायित्वों और साझा प्राथमिकताओं को भी रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से लिखा कि भारत और ब्राजील साथ मिलकर विभिन्न अहम क्षेत्रों में अपने आपसी सहयोग को लगातार मजबूत करना जारी रखेंगे। इसके साथ ही दोनों राष्ट्र ‘ग्लोबल साउथ’ की साझा प्राथमिकताओं और हितों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मजबूती से आगे बढ़ाएंगे। पीएम मोदी ने इस बात पर विशेष बल दिया कि दोनों देशों का संयुक्त प्रयास एक अधिक समावेशी, न्यायसंगत और टिकाऊ दुनिया के निर्माण की दिशा में केंद्रित रहेगा, जिससे विकासशील देशों की आवाज को विश्व स्तर पर सही प्रतिनिधित्व मिल सके।
ब्राजील की राजनीति के इतिहास में लूला दा सिल्वा की यह जीत बेहद अभूतपूर्व और ऐतिहासिक मानी जा रही है। इस चुनाव के पहले दौर के मतदान में लूला अपने प्रतिद्वंद्वी फ्लावियो बोल्सोनारो से पिछड़ गए थे, लेकिन दूसरे और अंतिम दौर के कड़े मुकाबले में उन्होंने पूरी बाजी पलट दी। वर्ष 1989 में ब्राजील में प्रत्यक्ष राष्ट्रपति चुनाव प्रणाली की शुरुआत हुई थी। उसके बाद के लोकतांत्रिक इतिहास में यह पहला अवसर है, जब पहले राउंड की वोटिंग में दूसरे नंबर पर रहने वाला कोई उम्मीदवार अंतिम राउंड के नतीजों में जीत हासिल कर राष्ट्रपति पद तक पहुंचा है। इस उलटफेर ने ब्राजील के चुनावी परिदृश्य में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
लूला दा सिल्वा का राजनीतिक सफर बेहद उतार-चढ़ाव और संघर्षों से भरा रहा है। इससे पहले वह वर्ष 2002 से 2010 तक लगातार दो कार्यकालों के लिए ब्राजील के राष्ट्रपति रहे थे। देश के संवैधानिक नियमों के तहत लगातार दो बार राष्ट्रपति रहने के बाद उन्हें अपना पद छोड़ना पड़ा था। इसके बाद के वर्षों में उन्हें भारी राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा और वर्ष 2018 में भ्रष्टाचार के एक मामले में उन्हें जेल की सजा भी काटनी पड़ी थी। हालांकि, बाद में अदालत द्वारा उनकी सजा रद्द कर दी गई, जिसके बाद उन्होंने सार्वजनिक जीवन में वापसी की और 2022 के चुनाव में उतरकर राष्ट्रपति पद हासिल किया।
चुनावी मुकाबले में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने के बावजूद लूला दा सिल्वा के लिए आने वाले समय में सरकार चलाना और नीतियां लागू करना बिल्कुल भी आसान नहीं होगा। ब्राजील की संसद में दक्षिणपंथी दलों की स्थिति बेहद मजबूत है। बोल्सोनारो की लिबरल पार्टी और उनके गठबंधन के सहयोगियों को देश के निचले सदन में 280 से अधिक सीटें और सीनेट में लगभग 50 तक सीटें मिलने का अनुमान है। संसद में विपक्षी दलों के इस भारी बहुमत और दबदबे के कारण लूला प्रशासन को कोई भी बड़ा नीतिगत फैसला लागू करने अथवा विधायी कामकाज आगे बढ़ाने के लिए अन्य राजनीतिक दलों के समर्थन और आम सहमति पर पूरी तरह निर्भर रहना पड़ेगा।







