नागरिक अधिकार संगठन ‘सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस’ (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट की वाद सूची (कॉज लिस्ट) में शामिल नहीं हो सकी। इसके बाद उनकी कानूनी टीम ने बुधवार को अदालत से इस मामले पर तत्काल सुनवाई की मांग करने का फैसला किया है। दोनों नेताओं ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) अदालत द्वारा उनकी न्यायिक हिरासत दो दिनों के लिए और बढ़ाए जाने के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
CJP की कानूनी प्रमुख रत्ना सिंह ने बताया कि उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और देर रात ही मामले की तुरंत सुनवाई की अर्जी लगाई गई थी। उन्होंने कहा कि सौरव और आशुतोष को हिरासत में रखने का कोई औचित्य नहीं है और उन्हें एक मिनट भी जेल में नहीं रहना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि राजनीतिक कारणों से किसी नागरिक की व्यक्तिगत आजादी नहीं छीनी जा सकती और न्याय मिलने में किसी भी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए।
दो दिनों के लिए बढ़ाई गई न्यायिक हिरासत
यह पूरा मामला सोमवार को तब गहरा गया जब मंदिर मार्ग पुलिस थाने में तैनात नए विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष दोनों आरोपियों को पेश किया गया। सुनवाई के बाद मजिस्ट्रेट ने दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत को दो दिन और बढ़ाने का आदेश दे दिया।
दास और रांका को पुलिस ने 13 अक्टूबर को उस समय हिरासत में लिया था, जब वे सुरक्षा घेरा तोड़कर और गेट फांदकर प्रतिबंधित जंतर-मंतर परिसर में दाखिल हो गए थे। उल्लेखनीय है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के तहत जंतर-मंतर को अब आधिकारिक विरोध प्रदर्शन स्थल की श्रेणी से बाहर रखा गया है।
मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ अनुच्छेद 21 की दलील
शुरुआत में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने दोनों नेताओं को पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा था, जिसके समाप्त होने पर सोमवार को हिरासत दो दिन और बढ़ा दी गई। सीजेपी नेताओं ने अपनी याचिका में मजिस्ट्रेट के इस कदम को सीधे तौर पर चुनौती दी है।
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि न्यायिक हिरासत बढ़ाने का यह आदेश तय कानूनी प्रक्रियाओं और नियमों का खुला उल्लंघन करता है। साथ ही, यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत देश के प्रत्येक नागरिक को मिले जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार पर सीधा प्रहार है। अब कानूनी टीम की नजरें बुधवार को हाईकोर्ट द्वारा मामले को सुनवाई के लिए स्वीकार किए जाने पर टिकी हैं।







