अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में प्रवेश करते ही राजस्थान में मौसमी गतिविधियों ने अचानक करवट ले ली है। उत्तर भारत के पर्वतीय क्षेत्रों से होकर गुजर रहे पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने और पश्चिमी राजस्थान के ऊपर एक प्रेरित परिसंचरण तंत्र (इंड्यूस्ड साइक्लोनिक सर्कुलेशन) विकसित होने से वायुमंडलीय दबाव में बदलाव देखा जा रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के अनुसार, इस मौसमी प्रणाली के असर से 24 अक्टूबर को राज्य के कई हिस्सों में घने बादल छाने, मेघगर्जन और तेज झोंके वाली हवाओं के साथ बारिश की परिस्थितियां बनी हुई हैं। हालांकि, अगले 24 घंटों में यह तंत्र पूर्व की ओर स्थानांतरित होगा, जिससे 25 अक्टूबर से पश्चिमी इलाकों में राहत मिलने और पूर्वी संभागों में छिटपुट बारिश जारी रहने का अनुमान है।
संभागवार बारिश का पूर्वानुमान: 24 और 25 अक्टूबर को इन क्षेत्रों में असर
मौसम विभाग द्वारा जारी तात्कालिक पूर्वानुमान के मुताबिक, 24 अक्टूबर को बीकानेर, जयपुर और भरतपुर संभाग के जिलों में मौसम का सर्वाधिक प्रभाव देखने को मिल रहा है। इन क्षेत्रों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से अंधड़ चलने तथा गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम दर्जे की वर्षा होने की संभावना जताई गई है। इसके बाद, 25 अक्टूबर को मौसमी तंत्र का दायरा सिमट जाएगा। 25 अक्टूबर को पश्चिमी राजस्थान के अधिकांश जिलों में मौसम मुख्यतः साफ और शुष्क रहेगा, जबकि पूर्वी राजस्थान के अंतर्गत आने वाले जयपुर, कोटा और भरतपुर संभाग के कुछ स्थानों पर हल्की वर्षा दर्ज हो सकती है।
आगामी दिनों का रुख: 26 से 28 तक मौसम शुष्क, 29 अक्टूबर से फिर नया दौर
मौसम केंद्र की मध्यम अवधि की रिपोर्ट के अनुसार, 25 अक्टूबर के बाद राज्य में मौसमी गतिविधियों में ठहराव आएगा। 26, 27 और 28 अक्टूबर को पूरे प्रदेश में मौसम शुष्क रहने और दिन में खिली धूप निकलने का अनुमान व्यक्त किया गया है। हालांकि, यह स्थिरता अधिक समय तक नहीं टिकेगी। 29 और 30 अक्टूबर को एक बार फिर मौसमी हलचल तेज होने के आसार हैं। इस नए दौर में पूर्वी राजस्थान के जयपुर, कोटा और भरतपुर संभागों में पुनः गरज-चमक के साथ हल्की वर्षा और तेज हवाएं चलने का पूर्वानुमान जारी किया गया है।
तापमान का गणित: बाड़मेर में सबसे अधिक गर्मी, माउंट आबू और डूंगरपुर में रातें ठंडी
मौसम केंद्र जयपुर द्वारा 24 अक्टूबर को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, राज्य भर में दिन और रात के तापमान में भारी अंतर देखा जा रहा है। मरुस्थलीय जिले बाड़मेर में अधिकतम तापमान सबसे अधिक 38.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि डूंगरपुर में न्यूनतम तापमान लुढ़ककर 16.8 डिग्री सेल्सियस पर आ गया। राजधानी जयपुर में अधिकतम तापमान 33.8 डिग्री और न्यूनतम तापमान 21.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। अजमेर में अधिकतम 34.2 डिग्री और न्यूनतम 18.4 डिग्री, अलवर में अधिकतम 33.0 डिग्री और न्यूनतम 17.4 डिग्री, सीकर में अधिकतम 33.5 डिग्री और न्यूनतम 19.0 डिग्री तथा कोटा में अधिकतम तापमान 35.3 डिग्री और न्यूनतम 20.0 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ।
पश्चिमी और उत्तरी राजस्थान के कई जिलों में पारा 35 डिग्री के पार
प्रदेश के कई मैदानी और रेगिस्तानी हिस्सों में अभी भी तीखी धूप का असर बरकरार है, जिससे अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना हुआ है। बाड़मेर (38.8 डिग्री) के अलावा जैसलमेर में अधिकतम तापमान 38.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। इसके अलावा चूरू में 36.5 डिग्री, जोधपुर शहर में 36.4 डिग्री, पिलानी में 36.2 डिग्री और श्रीगंगानगर में 35.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। नागौर और जवाई बांध क्षेत्र में पारा 35.2 डिग्री रहा, जबकि भीलवाड़ा में 34.7 डिग्री, चित्तौड़गढ़ में 34.8 डिग्री और उदयपुर में 34.0 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया।
पर्वतीय केंद्र माउंट आबू में दिन सुहावना, फतेहपुर और प्रतापगढ़ में सुबह-शाम ठंडक
राज्य के एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू में दिन का अधिकतम तापमान राज्य में सबसे कम 28.0 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि यहां का न्यूनतम तापमान 15.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। मैदानी भागों में न्यूनतम पारे की बात करें तो डूंगरपुर (16.8 डिग्री) के बाद फतेहपुर और प्रतापगढ़ दोनों ही स्थानों पर रात का तापमान 17.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दिन में तेज धूप और रात में तापमान गिरने से राज्य में दोहरे मौसम का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है।
किसानों के लिए कृषि मौसम परामर्श: उपज को भीगने से बचाने के निर्देश
बेमौसम बारिश और तेज हवाओं की संभावना को देखते हुए मौसम विभाग ने प्रदेश के किसानों के लिए विशेष परामर्श जारी किया है। वर्तमान में खरीफ फसलों की कटाई और रबी की बुआई की तैयारियां चल रही हैं। विभाग ने काश्तकारों को सलाह दी है कि वे खेतों में कटी पड़ी फसलों और कृषि उपज मंडियों में खुले आसमान के नीचे रखे अनाज को सुरक्षित स्थानों पर ढककर रखें। मंडियों में खुले में रखे जिंसों पर तिरपाल की समुचित व्यवस्था रखने को कहा गया है ताकि अचानक आने वाली बौछारों और तेज हवाओं से उपज को नुकसान न पहुंचे।







