‘अंपायर ही पक्षपाती हो तो मैच खेलने का क्या मतलब’: चुनाव आयोग पर बरसे सचिन पायलट, CEC के खिलाफ ‘जन महाभियोग’ लाने की तैयारी

13.3 करोड़ वोटर के नाम हटाने पर सचिन पायलट का केंद्र पर हमला। मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ 'जन महाभियोग' और रामलीला मैदान रैली की तैयारी।

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देश की चुनावी व्यवस्था, मतदाता सूचियों की निष्पक्षता और संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच सियासी आर-पार की जंग तेज हो गई है। दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में 1 नवंबर को विपक्षी ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन की प्रस्तावित महारैली और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कदम उठाने से पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट ने निर्वाचन आयोग की कार्यशैली पर सीधा और तीखा प्रहार किया है। पायलट ने दो टूक शब्दों में कहा कि आज चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर देश के भीतर गंभीर सवाल खड़े हो चुके हैं। यदि मैच का अंपायर ही किसी एक पक्ष के साथ खड़ा दिखाई देने लगे, तो उस खेल के कोई मायने नहीं रह जाते।

समाचार एजेंसी से बातचीत करते हुए सचिन पायलट ने मतदाता सूची से करोड़ों नागरिकों के नाम काटे जाने के मुद्दे को लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया। उन्होंने दावा किया कि देश भर में मतदाता सूची से 13.3 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं, जो नागरिकों के सबसे बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकार यानी वोट देने के अधिकार पर खुला कुठाराघात है। पायलट ने कहा कि एक जीवंत लोकतंत्र केवल और केवल जनता के विश्वास की बुनियाद पर टिकता है। यदि किसी संस्था की बागडोर ऐसे हाथों में आ जाए जिसकी निष्पक्षता पर ही संदेह हो, तो फिर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की उम्मीद कैसे की जा सकती है? उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में हुई प्रशासनिक गलतियों और विसंगतियों के खिलाफ उनके पास ठोस आंकड़े और दस्तावेजी साक्ष्य मौजूद हैं, जिसके चलते विपक्ष को अब संवैधानिक और कानूनी दायरे के साथ-साथ ‘सार्वजनिक महाभियोग’ का रास्ता चुनना पड़ रहा है।

गौरतलब है कि ‘इंडिया’ गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ शनिवार को एक औपचारिक ‘सार्वजनिक महाभियोग’ (पब्लिक इंपीचमेंट) प्रक्रिया आयोजित करने की तैयारी की है। इससे पूर्व शुक्रवार को भारी मौसमी बदलाव और बारिश के कारण इस कार्यक्रम को स्थगित करना पड़ा था। इसके अलावा रविवार को ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) के तहत मतदाता सूचियों में हुई कथित गड़बड़ियों के खिलाफ रामलीला मैदान में एक विशाल रैली का आयोजन भी किया जा रहा है। पायलट ने आरोप लगाया कि संसद के भीतर जब भी विपक्ष ने इन गंभीर विसंगतियों पर चर्चा की मांग की,सरकार ने कोई जवाब नहीं दिया और कई सत्रों से गतिरोध की स्थिति बनाए रखी। संसद में आवाज दबाए जाने के कारण ही विपक्ष को इन संवेदनशील मुद्दों को सीधे जनता की अदालत और सार्वजनिक मंचों पर ले जाने के लिए विवश होना पड़ा है।

सचिन पायलट ने मुख्य चुनाव आयुक्त की चयन प्रक्रिया और नए कानूनों के तहत उन्हें दी जाने वाली कानूनी छूट (इम्युनिटी) पर भी गहरे सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि पहले की चयन समिति में प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल होते थे, जिससे संतुलन बना रहता था। उन्होंने सवाल किया कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी कि सरकार को नया कानून लाकर मुख्य चुनाव आयुक्त को पद छोड़ने के बाद भी जीवन भर के लिए अभियोजन से सुरक्षा देनी पड़ी? पायलट ने कहा कि देश में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, सेना प्रमुख या रॉ निदेशक तक को ऐसी आजीवन कानूनी सुरक्षा नहीं मिलती, जो अब चुनाव आयुक्तों को दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई कई मोर्चों पर जारी है—विपक्ष सुप्रीम कोर्ट भी गया है और साथ ही युवाओं व आम जनता को भी जागरूक कर रहा है, ताकि संवैधानिक संस्थाएं राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर पारदर्शी तरीके से काम कर सकें।

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