एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) को लेकर चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच जारी विवाद के बीच भारतीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। INDIA गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 30 अक्टूबर को सार्वजनिक विरोध कार्यक्रम और 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में महारैली करने की तैयारी की है। दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक के विधान परिषद चुनावों के नतीजों ने भाजपा को कांग्रेस पर हमला बोलने का नया मौका दे दिया है।
दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, विधान परिषद चुनावों में कांग्रेस को कई राज्यों में निराशा का सामना करना पड़ा है, जबकि भाजपा ने कई सीटों पर जीत दर्ज की है। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी ने भी बेहतर प्रदर्शन करके गठबंधन के लिए राहत की स्थिति बनाई है। इसी बीच कर्नाटक और दिल्ली की मतदाता सूचियों में एसआईआर के दौरान बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के आंकड़ों ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर बहस और तेज कर दी है।
INDIA गठबंधन की रणनीति: 30 अक्टूबर को CEC के खिलाफ कार्यक्रम
कांग्रेस नेता जयराम रमेश के अनुसार, INDIA गठबंधन 30 अक्टूबर 2026 को दोपहर 3:30 बजे नई दिल्ली स्थित 10 राजाजी मार्ग पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सार्वजनिक विरोध कार्यक्रम आयोजित करेगा। गठबंधन ने इसे सार्वजनिक महाभियोग कार्यक्रम का नाम दिया है। हालांकि, यह औपचारिक संवैधानिक महाभियोग प्रक्रिया से अलग राजनीतिक विरोध का कार्यक्रम है।
विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग ने चुनावी प्रक्रिया में निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की अपनी जिम्मेदारी का उचित निर्वहन नहीं किया। कांग्रेस का दावा है कि एसआईआर के कारण मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। पार्टी ने इस मुद्दे को लोकतंत्र और मताधिकार से जुड़ा मामला बताया है।
इसके बाद 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की महारैली प्रस्तावित है। इसके लिए ‘चलो दिल्ली’ का नारा दिया गया है। राहुल गांधी ने इस अभियान को किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं बताते हुए आम नागरिकों से इसमें भाग लेने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि ज्ञानेश कुमार को पद से हटाए जाने तक उनकी लड़ाई जारी रहेगी।
विधान परिषद चुनावों में भाजपा का प्रदर्शन, कांग्रेस को झटका
एसआईआर को लेकर जारी राजनीतिक टकराव के बीच चार राज्यों के विधान परिषद चुनावों के परिणामों ने बहस को नया मोड़ दे दिया है। उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, भाजपा ने उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र और बिहार में कई सीटों पर जीत हासिल की है, जबकि कांग्रेस को निराशा का सामना करना पड़ा है।
कांग्रेस ने इन चुनावों में जिन सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे, उनमें उसे विशेष रूप से कर्नाटक, महाराष्ट्र और बिहार में नुकसान उठाना पड़ा। दूसरी तरफ, उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के प्रदर्शन ने विपक्षी खेमे को कुछ राहत दी है।
इन परिणामों को लेकर भाजपा ने कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन पर सवाल उठाए हैं। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया और बैलेट पेपर को लेकर सवाल उठाने वालों को उन चुनावों के परिणामों पर भी विचार करना चाहिए, जिनमें बैलेट पेपर का इस्तेमाल किया गया।
भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी को चुनावी हार के कारणों पर आत्ममंथन करना चाहिए। भाजपा नेताओं का तर्क है कि चुनावी परिणामों के आधार पर कांग्रेस के आरोपों पर सवाल उठते हैं।
हालांकि, विधान परिषद के चुनावों के नतीजे अपने आप में एसआईआर से जुड़े आरोपों को सही या गलत साबित नहीं करते। मतदाता सूची की शुद्धता और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता अलग-अलग मुद्दे हैं, जिनका मूल्यांकन संबंधित तथ्यों और प्रक्रियाओं के आधार पर किया जाना चाहिए।
बिहार में कांग्रेस को झटका, सपा ने उत्तर प्रदेश में दिखाई ताकत
बिहार के दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में दिए गए विवरण के अनुसार, जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) समर्थित उम्मीदवार सुरेश प्रसाद राय ने कांग्रेस के मौजूदा एमएलसी मदन मोहन झा को 324 वोटों से हराया। इस परिणाम को कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
उत्तर प्रदेश में तस्वीर कुछ अलग रही। विधान परिषद की 11 शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की सीटों की मतगणना के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, छह सीटों के परिणाम घोषित होने तक भाजपा ने चार और समाजवादी पार्टी ने दो सीटों पर जीत दर्ज की थी। शेष पांच सीटों पर मतगणना जारी होने की जानकारी दी गई थी।
समाजवादी पार्टी के प्रदर्शन को INDIA गठबंधन के लिए राहत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, सभी सीटों के अंतिम परिणाम सामने आने के बाद ही राज्य में दलों के प्रदर्शन का पूरा आकलन किया जा सकेगा।
जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनावी हार के बावजूद पार्टी नेतृत्व वास्तविकता से दूर दिखाई देता है। उन्होंने कांग्रेस के प्रदर्शन को संगठनात्मक कमजोरी से जोड़ते हुए कहा कि चुनावी नतीजों से विपक्ष को अपनी रणनीति पर विचार करना चाहिए।
कर्नाटक में एसआईआर के बाद लगभग एक करोड़ मतदाता कम
एसआईआर को लेकर विवाद का एक प्रमुख कारण कर्नाटक की अंतिम मतदाता सूची में मतदाताओं की संख्या में आई बड़ी गिरावट है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, राज्य में एसआईआर से पहले 5,54,32,314 मतदाता दर्ज थे। 27 अक्टूबर को प्रकाशित अंतिम सूची में यह संख्या घटकर 4,55,00,011 रह गई। यानी कुल संख्या में लगभग 99.32 लाख की कमी दर्ज हुई।
इस आंकड़े ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में अनियमितताएं हुईं और कुछ क्षेत्रों में फॉर्म-7 के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठे। दूसरी तरफ, चुनाव अधिकारियों ने प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा है कि सूची का संशोधन निर्धारित नियमों के तहत किया गया।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि मतदाताओं की कुल संख्या में आई गिरावट का अर्थ यह नहीं है कि हटाया गया हर नाम पात्र मतदाता का था या हर नाम गलत तरीके से हटाया गया। अधिकारियों के मुताबिक, अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और डुप्लिकेट प्रविष्टियों सहित विभिन्न श्रेणियों के आधार पर सूची में संशोधन किया गया है।
दिल्ली में भी मतदाता सूची को लेकर सवाल
दिल्ली में एसआईआर की मसौदा मतदाता सूची से लगभग 47.5 लाख नाम हटाए जाने की जानकारी सामने आई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, प्रक्रिया की शुरुआत में करीब 1.45 करोड़ मतदाता पंजीकृत थे, जबकि मसौदा सूची में लगभग 97.53 लाख नाम शामिल किए गए।
हटाए गए नामों को अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लिकेट यानी ASDD श्रेणियों में रखा गया। इस प्रक्रिया को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा की मांग की है।
दिल्ली में जारी प्रक्रिया के दौरान चुनाव आयोग को नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए फॉर्म-6 के आवेदन भी मिले हैं। अधिकारियों के अनुसार, नोटिस जारी किए गए मतदाताओं के मामलों का निपटारा किया जा रहा है और अंतिम सूची निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार प्रकाशित की जानी है।
मतदाता सूची में संशोधन का उद्देश्य पात्र मतदाताओं को शामिल करना और अपात्र या दोहराई गई प्रविष्टियों को हटाना है। लेकिन इस प्रक्रिया में किसी पात्र नागरिक का नाम छूटने की आशंका को दूर करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसलिए पारदर्शिता, सत्यापन और शिकायतों के समयबद्ध समाधान पर जोर दिया जा रहा है।
रामलीला मैदान की रैली से पहले व्यापारियों ने जताई चिंता
INDIA गठबंधन की प्रस्तावित रैली को लेकर दिल्ली के व्यापारिक संगठनों ने भी चिंता जताई है। व्यापारियों का कहना है कि त्योहारी सीजन में बड़ी राजनीतिक रैली होने से बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही और खरीदारी प्रभावित हो सकती है।
चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने राहुल गांधी से मुलाकात के लिए समय मांगा है, ताकि रैली के संभावित प्रभाव और व्यापारियों की चिंताओं पर चर्चा की जा सके।
कुल मिलाकर, एसआईआर विवाद ने चुनाव आयोग की भूमिका, मतदाता सूची की पारदर्शिता और विपक्ष की राजनीतिक रणनीति को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। एक तरफ INDIA गठबंधन 30 अक्टूबर के कार्यक्रम और 1 नवंबर की रैली के जरिए सरकार तथा चुनाव आयोग पर दबाव बनाने की तैयारी कर रहा है, वहीं भाजपा चुनावी परिणामों के आधार पर कांग्रेस के आरोपों को चुनौती दे रही है। आने वाले दिनों में राजनीतिक बयानबाजी के साथ-साथ मतदाता सूची से जुड़े तथ्यों और आधिकारिक प्रक्रियाओं पर भी देश की नजर रहेगी।







