लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के त्रिलोकपुरी इलाके में आयोजित एक विशेष ‘जन सुनवाई’ कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने सीधे उन नागरिकों से संवाद स्थापित किया जिनके नाम मतदाता सूची से काट दिए गए हैं। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार और चुनाव प्रबंधन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में शीर्ष स्तर से सुनियोजित ढंग से ‘वोट चोरी’ की जा रही है और करोड़ों आम नागरिकों को उनके सबसे बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकार यानी मतदान से वंचित किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष इस मामले को लेकर पीछे हटने वाला नहीं है और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे अथवा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा उन्हें पद से हटाए जाने तक यह राजनीतिक व कानूनी लड़ाई निरंतर जारी रहेगी।
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस बात को पुरजोर तरीके से रेखांकित किया कि वोट डालना प्रत्येक भारतीय नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन वर्तमान में सुनियोजित तरीके से करोड़ों नागरिकों से उनका यह अधिकार छीना जा रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष लंबे समय से इस गंभीर विषय को उठाता रहा है और अब पूरे देश की जनता यह भली-भांति समझने लगी है कि वोट चोरी की यह पूरी प्रक्रिया शीर्ष स्तर से संचालित की जा रही है। कांग्रेस नेता ने विशेष रूप से आरोप लगाया कि आर्थिक रूप से कमजोर और गरीब तबके के लोगों को निशाना बनाकर उनके नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं, ताकि समाज के वंचित वर्ग की आवाज और उनके लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाया जा सके।
नेता विपक्ष श्री @RahulGandhi ने ‘जन सुनवाई’ में शामिल होकर लोगों की समस्याएं सुनीं।
ज्ञानेश कुमार फर्जी तरीके से वोटर लिस्ट से लोगों के नाम काटकर ‘वोट चोरी’ को अंजाम दे रहे हैं-जो देशद्रोह है।
हम मिलकर इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएंगे, जनता के वोट का अधिकार बचाएंगे।
📍 त्रिलोकपुरी, दिल्ली
— Congress (@INCIndia) October 27, 2026
जन सुनवाई कार्यक्रम के दौरान सामने आए तथ्यों का हवाला देते हुए राहुल गांधी ने दावा किया कि केवल त्रिलोकपुरी के चार मतदान केंद्रों से ही 416 पात्र मतदाताओं के नाम पूरी तरह गैर-कानूनी ढंग से सूची से हटा दिए गए हैं। उन्होंने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े करते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे सवालों से बचने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने इस संबंध में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार से कई सीधे और तार्किक प्रश्न पूछे हैं, लेकिन वे इन सवालों का जवाब देने से लगातार बच रहे हैं और चुप्पी साधे हुए हैं। राहुल गांधी ने संकल्प दोहराते हुए कहा कि जब तक इस मामले में जवाबदेही तय नहीं होती और ज्ञानेश कुमार पद से नहीं हटते, तब तक यह विरोध और तेज होगा।
इसके साथ ही उन्होंने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार देश में एक ऐसी व्यवस्था स्थापित करने का प्रयास कर रही है, जिसमें सिर्फ चुनिंदा अरबपतियों के हितों की रक्षा की जाए। कांग्रेस नेता ने कड़े शब्दों में कहा कि प्रधानमंत्री केवल अमीरों का हिंदुस्तान बनाने पर तुले हुए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर नीयत साफ है, तो मतदाता सूचियों से केवल गरीबों, वंचितों और आम नागरिकों के नाम ही क्यों गायब किए जा रहे हैं। उनका आरोप था कि एक ऐसे तथाकथित नए भारत की रूपरेखा तैयार की जा रही है, जहां नागरिकों और खासकर गरीबों के अधिकारों को पूरी तरह कमजोर कर दिया जाए और पूरी प्रशासनिक व्यवस्था कुछ पूंजीपतियों के मुनाफे के लिए काम करे।
वोट हर भारतीय नागरिक का अधिकार है, लेकिन आज करोड़ों लोगों से उनका अधिकार छीना जा रहा है।
हम काफी समय से यह मुद्दा उठा रहे हैं, लेकिन अब पूरा देश समझ रहा है कि ‘वोट चोरी’ टॉप लेवल से की जा रही है। गरीबों को वोटर लिस्ट से हटाया जा रहा है।
नरेंद्र मोदी सिर्फ अमीरों का हिंदुस्तान बनाने पर तुले हैं।
आज की बैठक में सबने देखा कि कैसे 4 बूथों से 416 नाम गैर-कानूनी तरीके से हटा दिए गए। इस बारे में हम जब भी ज्ञानेश कुमार से सवाल पूछते हैं, तो वे कोई जवाब नहीं देते।
जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, तब तक पूरा विपक्ष एकजुट होकर इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाता रहेगा।
: नेता विपक्ष श्री @RahulGandhi
📍त्रिलोकपुरी, दिल्ली
— Congress (@INCIndia) October 27, 2026
त्रिलोकपुरी में आयोजित इस जन सुनवाई कार्यक्रम में विपक्षी दलों के कई प्रमुख नेता, कानूनी विशेषज्ञ और सामाजिक कार्यकर्ता भी अपनी एकजुटता प्रकट करने पहुंचे। कार्यक्रम में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण समेत नागरिक समाज के अनेक प्रतिष्ठित लोग उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने नागरिकों के मताधिकार की रक्षा और मतदाता सूची में हो रही कथित अनियमितताओं के खिलाफ साझा रूप से मुखर आवाज उठाने पर जोर दिया।







