श्चिम एशिया तनाव से कच्चा तेल 115 डॉलर पर, वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी अनिश्चितता

पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति बाधाओं के कारण कच्चा तेल 115 डॉलर प्रति बैरल के पास बना हुआ है।

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पश्चिम एशिया में लगातार गहराते भू-राजनीतिक तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल जारी है। सोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमतें 115 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रहीं। क्षेत्र में बढ़ते सैन्य संघर्ष के जोखिम और कच्चे तेल की निरंतर आपूर्ति को लेकर पैदा हुई गंभीर चिंताओं ने वैश्विक तेल बाजारों को पूरी तरह से हलकान और दबाव में रखा हुआ है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस भू-राजनीतिक संकट का शीघ्र समाधान नहीं निकला, तो वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है।

कच्चे तेल की कीमतों में पिछले एक सप्ताह के दौरान 5 प्रतिशत से भी अधिक की तेजी दर्ज की गई है। इस भारी उछाल के साथ अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड अपने 52 सप्ताह के उच्चतम स्तर 117.41 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के बेहद करीब कारोबार कर रहा है। कीमतों में यह तेज उछाल स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि मध्य पूर्व में जारी संघर्ष का सीधा और प्रतिकूल प्रभाव अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ रहा है। आपूर्ति में किसी भी प्रकार का संभावित व्यवधान दुनिया भर के बाजारों में घबराहट और अस्थिरता पैदा कर रहा है।

बाजार की वर्तमान स्थिति पर अपनी राय व्यक्त करते हुए एनरिच मनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) पोनमुडी आर ने कहा कि मध्य पूर्व में लगातार बना हुआ गतिरोध और तनाव के और अधिक भड़कने की आशंका घरेलू बाजारों के लिए भी सबसे बड़ी चिंता का विषय बनी हुई है। उनके अनुसार, जहां वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड लगभग 101 से 102 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में कारोबार कर रहा है, वहीं ब्रेंट क्रूड लगातार 115 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है। आपूर्ति को लेकर बनी यह लगातार अनिश्चितता कीमतों को मजबूती दे रही है और भारत जैसी प्रमुख ऊर्जा आयातक अर्थव्यवस्थाओं के आर्थिक परिदृश्य को जटिल बना रही है।

वैश्विक बाजार में यह अनिश्चितता केवल राजनयिक बयानों तक सीमित नहीं है, बल्कि महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और ऊर्जा शिपमेंट की सुरक्षा को लेकर उत्पन्न खतरों ने भी जोखिम को काफी बढ़ा दिया है। रविवार को अमेरिकी विदेश विभाग ने सऊदी अरब से अपने गैर-आपातकालीन सरकारी कर्मचारियों और उनके पात्र परिवार के सदस्यों को तत्काल देश छोड़ने का आदेश दिया है। रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास द्वारा की गई घोषणा के अनुसार, ईरान समर्थित हूती बलों द्वारा नागरिक हवाई अड्डों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हाल ही में किए गए मिसाइल तथा ड्रोन हमलों के चलते गंभीर सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।

इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह दावा किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से होने वाला तेल का पारगमन युद्ध-पूर्व स्तर को पार कर गया है। उन्होंने इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से जहाजों की आवाजाही को सुचारू बनाए रखने का श्रेय अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी और सैन्य अभियानों को दिया। हालांकि, ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि इस जलमार्ग की सुरक्षा अत्यंत संवेदनशील है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य सामान्य रूप से दुनिया भर के कुल समुद्री तेल और द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) प्रवाह के लगभग 20 से 25 प्रतिशत हिस्से को नियंत्रित करता है। ऐसे में इस मार्ग में आने वाला कोई भी संभावित व्यवधान वैश्विक ऊर्जा तंत्र के लिए बेहद विनाशकारी सिद्ध हो सकता है।

तेल आपूर्ति पर दबाव का एक अन्य बड़ा कारण हालिया संघर्षों के कारण रिफाइनिंग क्षमता को पहुंचा सीधा नुकसान है। हाल के दिनों में जारी शत्रुता,ड्रोन हमलों और मिसाइल हमलों ने मध्य पूर्व क्षेत्र में लगभग 30 लाख बैरल प्रतिदिन (3 मिलियन बैरल प्रति दिन) की क्षेत्रीय रिफाइनिंग क्षमता को पूरी तरह से ठप या बाधित कर दिया है। इतनी बड़ी मात्रा में रिफाइनिंग क्षमता के बंद होने से तैयार ईंधन उत्पादों की किल्लत बढ़ गई है, जिसने वैश्विक ऊर्जा कीमतों को और अधिक ऊपर धकेलने में अहम भूमिका निभाई है।

भू-राजनीतिक जोखिमों, रिफाइनिंग नेटवर्क के नुकसान और कच्चे तेल की भौतिक आपूर्ति में उत्पन्न वास्तविक बाधाओं के कारण कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर टिकी हुई हैं। मध्य पूर्व में लंबे समय तक अस्थिरता बने रहने की आशंकाओं ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों के भविष्य पर काले बादल ला दिए हैं। यह स्थिति उन सभी तेल आयातक देशों के लिए दोहरी चुनौती खड़ी कर रही है, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर अत्यधिक निर्भर हैं, क्योंकि कच्चे तेल का यह उच्च स्तर आयात बिल, मुद्रास्फीति और आर्थिक विकास पर दीर्घकालिक दबाव बना रहा है।

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