Nagaur Sarpanch Election Result: राजस्थान के नागौर जिले के बरण गांव में सरपंच चुनाव का परिणाम चर्चा का विषय बन गया है। यहां राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के सुप्रीमो और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल के परिवार की दो बहुएं सरपंच पद के लिए आमने-सामने थीं। चुनाव में छोटी भाभी राजबाला ने 982 वोट हासिल कर जीत दर्ज की, जबकि बड़ी भाभी मीरा को केवल 21 वोट मिले। दोनों प्रत्याशियों के बीच 961 वोटों का अंतर रहा। वहीं, हनुमान बेनीवाल के मतदान करने नहीं पहुंचने की बात ने भी इस चुनाव को लेकर चर्चाओं को बढ़ा दिया है।
बरण गांव में राजबाला बनीं नई सरपंच
नागौर जिले के बरण गांव में सरपंच पद के लिए कुल छह महिला प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा। हालांकि, मुकाबले में सबसे अधिक चर्चा सांसद हनुमान बेनीवाल के परिवार की दो महिला प्रत्याशियों को लेकर रही। इनमें राजबाला पत्नी प्रेमसुख बेनीवाल और मीरा पत्नी स्वर्गीय रामप्रसाद बेनीवाल शामिल थीं।
मतगणना के बाद सामने आए परिणामों में राजबाला को 982 वोट मिले, जबकि मीरा के खाते में केवल 21 वोट आए। इस तरह राजबाला ने 961 वोटों के अंतर से जीत हासिल की और गांव की नई सरपंच बनीं।
दोनों प्रत्याशियों के बीच वोटों का यह अंतर स्थानीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। चुनाव में परिवार की दो बहुओं के आमने-सामने होने के कारण ग्रामीणों और राजनीतिक हलकों की नजरें परिणाम पर टिकी हुई थीं।
राजनीतिक परिवार से जुड़ी मीरा को मिले महज 21 वोट
इस चुनाव में मीरा को मिले 21 वोटों ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उनके पति स्वर्गीय रामप्रसाद बेनीवाल लंबे समय तक राजनीति में सक्रिय रहे थे। इसके बावजूद सरपंच चुनाव में मीरा को बहुत कम मत मिले।
दूसरी ओर, राजबाला को 982 मतदाताओं का समर्थन प्राप्त हुआ। दोनों प्रत्याशियों के बीच इतने बड़े अंतर से आए परिणाम ने बरण गांव के चुनाव को चर्चा में ला दिया है।
हालांकि, केवल वोटों के आंकड़ों के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि मतदाताओं ने किस वजह से किसी प्रत्याशी का समर्थन किया या किसी को कम वोट दिए। इसके लिए स्थानीय चुनावी परिस्थितियों, प्रत्याशियों के प्रचार और मतदाताओं की प्राथमिकताओं से जुड़ी अधिक जानकारी की आवश्यकता होगी।
हनुमान बेनीवाल ने क्यों नहीं किया मतदान?
बरण गांव के सरपंच चुनाव से जुड़ा एक और पहलू हनुमान बेनीवाल का मतदान करने नहीं पहुंचना बताया जा रहा है। इस घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक चर्चाएं हो रही हैं। कुछ रिपोर्टों और सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि वह परिवार के सदस्यों के चुनाव लड़ने से नाराज थे और पारिवारिक राजनीति से दूरी बनाए रखना चाहते थे।
यह भी कहा जा रहा है कि उनकी इच्छा थी कि परिवार के सदस्यों के बजाय गांव के अन्य लोग चुनाव मैदान में उतरें। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। हनुमान बेनीवाल के मतदान नहीं करने के पीछे की वास्तविक वजह स्पष्ट करने के लिए उनके आधिकारिक बयान या अन्य विश्वसनीय पुष्टि की आवश्यकता है।
इसलिए मतदान से दूरी को सीधे तौर पर पारिवारिक नाराजगी का परिणाम मानना अभी जल्दबाजी होगी।
परिवार की राजनीति को लेकर चर्चाएं तेज
राजस्थान की स्थानीय राजनीति में पंचायत चुनावों का महत्व काफी अधिक होता है। सरपंच का चुनाव सीधे गांव के विकास, स्थानीय नेतृत्व और ग्रामीणों के प्रतिनिधित्व से जुड़ा होता है। ऐसे में जब किसी राजनीतिक परिवार के सदस्य एक ही पद के लिए चुनाव मैदान में उतरते हैं, तो मुकाबला स्थानीय स्तर से आगे भी चर्चा में आ जाता है।
बरण गांव में राजबाला और मीरा के बीच मुकाबले ने भी इसी वजह से ध्यान आकर्षित किया है। एक ओर राजबाला ने 982 वोट हासिल कर जीत दर्ज की, वहीं दूसरी ओर मीरा को केवल 21 वोट मिले। इसके साथ ही हनुमान बेनीवाल के मतदान नहीं करने की खबर ने राजनीतिक चर्चाओं को और बढ़ा दिया है।
फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम में सबसे स्पष्ट तथ्य चुनाव परिणाम और दोनों प्रत्याशियों के बीच वोटों का अंतर है। वहीं, हनुमान बेनीवाल की कथित नाराजगी और परिवार के भीतर राजनीतिक मतभेदों को लेकर सामने आ रही बातें स्वतंत्र पुष्टि की प्रतीक्षा में हैं।







